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17 Apr 2026, Fri

बस्ती में निजी अस्पतालों की मनमानी! पार्किंग और प्रतीक्षालय के नियमों की खुलेआम अनदेखी

By Aijaz Alam Khan (Editor)

बस्ती/उत्तर प्रदेश:
जनपद बस्ती में संचालित कई निजी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शासन द्वारा निर्धारित मानकों के बावजूद, अधिकांश अस्पतालों में न तो समुचित पार्किंग व्यवस्था है और न ही मरीजों व तीमारदारों के लिए पर्याप्त प्रतीक्षालय (वेटिंग एरिया) उपलब्ध कराया गया है।


स्थानीय निरीक्षण में यह सामने आया कि कई नामचीन अस्पताल—जैसे कटरा और पिंडारी क्षेत्र के कुछ निजी अस्पताल—नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। अस्पताल परिसर में पार्किंग की व्यवस्था न होने के कारण एम्बुलेंस, दोपहिया और चारपहिया वाहन सड़कों पर ही खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे आम जनता को जाम और असुविधा का सामना करना पड़ता है।


इतना ही नहीं, कुछ स्थानों पर नालियों के ऊपर जनरेटर और बोर्ड रख दिए गए हैं, जो सुरक्षा मानकों का सीधा उल्लंघन है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यालय के सामने और यहां तक कि परिसर के अंदर भी एम्बुलेंस खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे व्यवस्था और भी बिगड़ जाती है।
प्रतीक्षालय की बदहाल स्थिति:
अस्पतालों में पर्याप्त वेटिंग एरिया न होने के कारण तीमारदारों को सीढ़ियों पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ता है। लंबी प्रतीक्षा के दौरान कई लोग वहीं सो जाते हैं। बैठने की व्यवस्था में सामाजिक दूरी का कोई पालन नहीं दिखता। मनोरंजन के नाम पर लगाए गए टीवी या तो बंद रहते हैं या सिर्फ अस्पताल का प्रचार प्रसारित करते हैं।


सरकारी मानकों की अनदेखी:
नियमों के अनुसार, प्रत्येक निजी अस्पताल को अपने परिसर या आसपास पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था करना अनिवार्य है। न्यूनतम 10 बेड वाले अस्पताल में भी पार्किंग होना जरूरी है। साथ ही, प्रतीक्षालय साफ, हवादार, आरामदायक और संक्रमण नियंत्रण के अनुरूप होना चाहिए। मरीजों और तीमारदारों के बैठने के बीच कम से कम 4 फीट की दूरी, दिव्यांगों के लिए रैंप, पीने का पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी अनिवार्य हैं।
बड़ा सवाल:
क्या बस्ती के निजी अस्पताल शासन द्वारा तय किए गए इन मूलभूत मानकों का पालन कर रहे हैं, या फिर मरीजों की सुविधा के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं?
प्रशासन से मांग:
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ऐसे अस्पतालों की जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं मिल सकें।

रिपोर्ट: परमानन्द मिश्रा

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