आगरा। गुप्त क्रांतिकारी दल ‘मातृवेदी’ के कमांडर-इन-चीफ और आज़ादी के रणबांकुरे गेंदालाल दीक्षित जी की 127वीं जयंती संजय पैलेस स्थित शहीद स्मारक पार्क में बड़े ही सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े शोधकर्ताओं, समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों ने उपस्थित होकर क्रांतिकारी की स्मृति को नमन किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह प्रतिमाओं की सफाई के साथ हुआ। बाह तहसील के ग्राम मई में जन्मे अमर शहीद गेंदालाल दीक्षित पुत्र भोलानाथ दीक्षित की प्रतिमा के साथ-साथ स्मारक में स्थापित अन्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की प्रतिमाओं को भी साफ कर सजाया गया। आयोजनकर्ताओं का कहना था कि यह केवल जयंती मनाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन सभी गुमनाम और कम चर्चित क्रांतिकारियों को श्रद्धा अर्पित करने का अवसर है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे देश की आज़ादी का मार्ग प्रशस्त किया।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल गुप्ता ने गेंदालाल दीक्षित की प्रतिमा पर माला अर्पित की और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शहीद स्मारक पर लगी अन्य प्रतिमाओं पर भी अंगवस्त्र चढ़ाए तथा कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए बलिदान करने वाले क्रांतिकारियों की स्मृति को सहेजकर रखना समाज का दायित्व है।
चलभाष के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े चर्चित घुमक्कड़ पत्रकार शाह आलम राना ने भी दीक्षित जी को जन्मदिन पर नमन किया। उन्होंने घोषणा की कि आगामी 21 दिसंबर, जो गेंदा लाल दीक्षित की पुण्यतिथि है, उसे उनके पैतृक गाँव में जाकर मनाया जाएगा। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में इस स्मृति कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की, ताकि युवाओं के बीच क्रांतिकारियों के वास्तविक योगदान को उजागर किया जा सके।
वरिष्ठ पत्रकार शंकर देव तिवारी ने आगरा विकास प्राधिकरण से मांग की कि शहीद स्मारक में गेंदालाल दीक्षित का नाम स्थायी रूप से अंकित कराया जाए, ताकि लोग उनके बलिदान के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि दीक्षित जी की जन्मतिथि और पुण्यतिथि के अवसर पर शहीद स्मारक में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क होना चाहिए, जिससे अधिक से अधिक लोग वहां आकर राष्ट्रनायकों के प्रति सम्मान व्यक्त कर सकें।
कार्यक्रम में बनबारी लाल तिवारी, प्रगतिशील शिक्षा प्रसार समिति के अध्यक्ष राजेश शर्मा सहित कई वक्ताओं ने गेंदालाल दीक्षित के जीवन, संघर्ष और गुप्त क्रांतिकारी संगठन ‘मातृवेदी’ की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि दीक्षित जी ने अत्यंत अल्प संसाधनों और गुप्त रणनीतियों के माध्यम से अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी तथा चंबल अंचल के बागीयों को राष्ट्रवादी आंदोलन से जोड़ा।
कार्यक्रम में निर्देश तिवारी, संतोष तिवारी, मुकुल तिवारी, मणिका शर्मा, नेहा, रुचि सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
अंत में कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार शंकर देव तिवारी ने किया।
ब्यूरो रिपोर्ट
AKP News 786
