डॉ. वी. के. वर्मा

बस्ती – ठंड ने दस्तक दी, तो आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. वी. के. वर्मा ने भी जनता को समय रहते सतर्क कर दिया।
उन्होंने कहा कि सर्दियाँ आराम की नहीं, एहतियात की मौसम होती हैं, इसलिए खुद को सुरक्षित रखना हर किसी की प्राथमिकता होनी चाहिए।
डॉ. वर्मा के मुताबिक, गर्म कपड़े, गुनगुना पानी और सुबह-शाम की कड़ाके की ठंड से दूरी—ये तीन बातें आपकी पहली ढाल हैं।
उन्होंने बताया कि अदरक, गुड़, तुलसी, काली मिर्च और हल्दी जैसे देसी नुस्खे हर बार साबित करते हैं कि घर की रसोई ही सबसे बड़ा औषधालय है।
उन्होंने हृदय रोगियों के लिए विशेष चेतावनी देते हुए कहा कि सर्दी के मौसम में रक्त वाहिकाएँ सिकुड़ जाती हैं, जो दिल पर दबाव बढ़ा देती हैं।
इसलिए हार्ट मरीज सुबह की ठिठुरन में बाहर न निकलें, बल्कि धूप खिलने के बाद की हल्की वॉक ही चुनें।
शरीर को गर्म रखें, तैलीय व भारी भोजन सीमित करें, और नमक-तेल का संतुलन ज़रूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर सीने में दर्द, असामान्य थकान या सांस लेने में दिक्कत महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें—तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉ. वर्मा ने आगे बताया कि आयुष काढ़ा, भाप लेना और हल्का योग, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में बेहद मददगार हैं।
बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए तापमान के उतार-चढ़ाव से बचना, और टोपी, मोज़े, दस्ताने जैसे गर्म वस्त्र पहनना अनिवार्य बताया।
उन्होंने कहा कि सर्दी में शरीर जितना गर्म रहे, उतना ही मन शांत रहना चाहिए, इसलिए तनाव से दूरी और तरल पदार्थों का पर्याप्त सेवन बहुत ज़रूरी है।
अंत में डॉ. वर्मा ने दो टूक कहा—
“ठंड से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है—समय पर सावधानी।”
रिज़वान खान की रिपोर्ट
AKP News 786
