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21 Apr 2026, Tue

घुंघुर नृत्य एकेडमी महोत्सव: 7 शानदार प्रस्तुति जिन्होंने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

By Editor Aijaz Alam Khan

घुंघुर नृत्य एकेडमी महोत्सव: संस्कृति और प्रतिभा का भव्य संगम

घुंघुर नृत्य एकेडमी महोत्सव इस वर्ष बोगुला कॉलेज पारा में बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, बल्कि भारतीय परंपरा, कला और युवा प्रतिभाओं को मंच देने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी साबित हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की पूजा के साथ किया गया। इस दौरान पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक गरिमा का माहौल देखने को मिला।

शानदार शुरुआत और सांस्कृतिक माहौल

घुंघुर नृत्य एकेडमी महोत्सव की शुरुआत बेहद भव्य रही। मुख्य अतिथि तताई चक्रवर्ती, सर्मिस्था मुखर्जी, शंकर नारायण चक्रवर्ती, देवाशीष सरकार और रत्ना ढालि ने दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसके बाद मां सरस्वती को माल्यार्पण कर कार्यक्रम को औपचारिक रूप से शुरू किया गया।

इस दौरान उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम का मंच साज-सज्जा और प्रस्तुति दोनों ही दृष्टिकोण से बेहद आकर्षक रहा।

भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन

घुंघुर नृत्य एकेडमी महोत्सव में भारतीय संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। गुरु सृजिता सरकार के निर्देशन में कलाकारों ने भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों और ऐतिहासिक विरासत को नृत्य नाटिका के माध्यम से प्रस्तुत किया।

राष्ट्रीय ध्वज, मोर, कमल, बरगद, हॉकी, रॉयल बंगाल टाइगर और वीणा जैसे प्रतीकों के महत्व को बेहद सुंदर ढंग से दर्शाया गया। यह प्रस्तुति न केवल मनोरंजन का साधन बनी, बल्कि दर्शकों को ज्ञानवर्धक अनुभव भी प्रदान किया।

कलाकारों की दमदार प्रस्तुतियां

घुंघुर नृत्य एकेडमी महोत्सव में युवा कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। श्रेया जोद्दार, समीर चक्रवर्ती, लाबोनि, दीक्षा राय, जीनिया सरकार और अन्य कलाकारों ने अपने नृत्य के माध्यम से राष्ट्र गौरव की गाथा प्रस्तुत की।

रवींद्रनाथ टैगोर की रचना ‘राजपूत वीर’ पर आधारित प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके साथ ही सत्यजीत राय की ‘पाथेर पांचाली’ की झलक ने कार्यक्रम को और भी खास बना दिया।

नारी सशक्तिकरण और भक्ति रस की झलक

घुंघुर नृत्य एकेडमी महोत्सव में केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश भी दिए गए। राधा-कृष्ण वियोग, भक्ति रस और नारी सशक्तिकरण पर आधारित प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

स्वाति विश्वास, रिंकी विश्वास, स्वागता विश्वास और अन्य कलाकारों ने भावनाओं से भरपूर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन प्रस्तुतियों में धैर्य, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व जैसे महत्वपूर्ण संदेश भी शामिल थे।

सम्मान और उपलब्धियों का गौरव

घुंघुर नृत्य एकेडमी महोत्सव में गुरु सृजिता सरकार की उपलब्धियों को भी सराहा गया। उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है, जो उनकी कला और समर्पण का प्रमाण है।

2016 में राष्ट्रीय नृत्य पावनी अवार्ड, 2020 में राष्ट्रीय पुरस्कार और अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर सम्मान जैसी उपलब्धियों ने इस महोत्सव की गरिमा को और बढ़ा दिया।

युवाओं के लिए प्रेरणा और भविष्य की दिशा

घुंघुर नृत्य एकेडमी महोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने और अपनी प्रतिभा को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आज के डिजिटल युग में जहां पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ रहा है, ऐसे कार्यक्रम भारतीय परंपरा को जीवित रखने का काम कर रहे हैं।

इस महोत्सव ने यह साबित कर दिया कि अगर सही मार्गदर्शन और मंच मिले, तो युवा कलाकार अपनी प्रतिभा से समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

घुंघुर नृत्य एकेडमी महोत्सव आने वाले समय में भी इसी तरह संस्कृति और कला को बढ़ावा देता रहेगा और नई ऊंचाइयों को छूता रहेगा।

रिपोर्ट : रिजवान खान

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