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2 Mar 2026, Mon

जन स्वास्थ्य सत्याग्रह- निजी हॉस्पिटल्स का सच! दावे बड़े… हालत शर्मनाक!

जन स्वास्थ्य सत्याग्रह :जन स्वास्थ्य सत्याग्रह:बस्ती। AKP NEWS 786 की जन स्वास्थ्य सत्याग्रह मुहिम — पांचवा रिपोर्ट
प्राइवेट अस्पतालों के बड़े दावे, लेकिन सच्चाई के नाम पर सवालों का पहाड़
बस्ती शहर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से खुलते छोटे–छोटे निजी अस्पतालों के बड़े–बड़े दावों की वास्तविकता जानने तथा स्वास्थ्य सेवाओं की असल तस्वीर जनता के सामने लाने के उद्देश्य से AKP NEWS 786 द्वारा जन स्वास्थ्य सत्याग्रह मुहिम के अंतर्गत किए गए समाचार संकलन में लगातार चौंकाने वाली तस्वीर सामने आ रही है।
इसी क्रम में शहर के कटेश्वर पार्क के पास स्थित जीवनदायिनी हॉस्पिटल तथा गांव गोड़िया मोहल्ले में संचालित राज हॉस्पिटल की जमीनी सच्चाई को परखा गया।


यह पूरी रिपोर्ट हमारे सहयोगी परमानन्द मिश्रा के समाचार संकलन व प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित है।
बस्ती। शहर के कटेश्वर पार्क के पास स्थित जीवनदायिनी हॉस्पिटल — दावे बड़े, लेकिन दायरा छोटा
कटेश्वर पार्क के पास एक छोटे से कमरे में संचालित जीवनदायिनी हॉस्पिटल अपने बड़े-बड़े दावों को लेकर चर्चा में है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ओ•पी•डी निशुल्क होगी, नॉर्मल डिलीवरी रियायती दरों पर तथा ऑपरेशन भी कम कीमत पर किए जाएंगे। साथ ही विभिन्न प्रकार की सर्जरी एवं मेडिकल सुविधाएँ भी कम कीमत पर उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। अस्पताल में दिन-रात (24×7) सुविधा उपलब्ध रहने की बात भी कही गई है। ये सभी दावे डॉ. अनन्या चौधरी की ओर से किए गए हैं।
हालांकि AKP NEWS 786 द्वारा इन दावों की जमीनी हकीकत पर समाचार संकलन जब किया गया तो हालात कुछ और ही नजर आई।
अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक, सर्जन, प्रशिक्षित नर्स एवं फिज़िशियन की स्पष्ट उपलब्धता नहीं दिखाई दी।
प्रश्न यह भी उठता है कि इतने छोटे दायरे वाले हॉस्पिटल में चौबीस घंटे मरीजों का उपचार कैसे संभव होगा, यह बात समझ से परे है।
अस्पताल परिसर में एक छोटा-सा मेडिकल स्टोर है और मात्र चार–पाँच बेड हैं, वह भी मानक दूरी के विपरीत लगे हुए हैं। हॉस्पिटल के पश्चिमी भाग में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का बोर्ड भी लगा है, जो नियमानुसार नहीं है। इसके अलावा फायर सेफ्टी के लिए फायर सेफ्टी मशीन भी मौजूद नहीं है। अस्पताल के बाहर कूड़े-करकट का ढेर लगा रहता है, जिससे संक्रमण जनित बीमारियाँ फैलने की आशंका बनी रहती है।
संपर्क करने पर डॉ. अनन्या चौधरी ने बताया कि “मैं जल्द ही अस्पताल का विस्तार करुँगी और विधिवत उद्घाटन किया जाएगा।”
अब जीवनदायिनी हॉस्पिटल कितने मरीजों को वास्तव में जीवनदान दे पाएगा — यह समय ही बताएगा।
अब बात करते है “ गांव गोड़िया मोहल्ले में संचालित हो रहा ‘राज हॉस्पिटल’ जो अब एक राज बन गया है। छोटे कमरे में चल रहे इस हॉस्पिटल में डॉक्टर कब आते हैं, कब चले जाते हैं — यहां उपस्थित कर्मियों को भी कुछ पता नहीं है।


अग्निशमन यंत्र तथा एम्बुलेंस वाहन तक उपलब्ध नहीं है। एक सर्वेक्षण में लोगों के अनुसार पता चला कि डॉक्टर कभी शादी में चले जाते हैं, कभी कचहरी किसी काम से चले जाते हैं। केबिन भी अधिकतर खाली रहता है। यहां एक-दो महिलाएं कार्यरत बताई जाती हैं, जो बिना ड्रेस के रहती हैं।
‘राज हॉस्पिटल’ बोर्ड के नीचे का शटर बंद है तथा वहाँ टिफिन सेंटर का पोस्टर लगा हुआ है। यहाँ कौन-से चिकित्सक किस बीमारी का इलाज करते हैं — उनके नाम तथा डिग्री का कोई बोर्ड नहीं लगा है। बोर्ड के पास पंजीकरण संख्या अंकित है, किंतु हॉस्पिटल संचालक तथा चिकित्सक का नाम गायब है।
ऐसा माना जा रहा है कि इस अस्पताल का सच स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों की जांच के बाद ही खुल सकेगा। इस संबंध में हॉस्पिटल के किसी जिम्मेदार चिकित्सक या संचालक से बार-बार मिलने का प्रयास किया गया, किंतु मुलाकात न होने के कारण उनका पक्ष शामिल नहीं किया जा सका।
जिला प्रशासन से मांग है की जाँच करके करवाई करें और मानक विहीन अस्पतालों के विरुद्ध उचित करवाई करें जिससे आम जन मानस बली का बकरा न बने

📍 आने वाली रिपोर्टों में अन्य निजी हॉस्पिटल और क्लीनिकों की स्थिति भी उजागर की जाएगी।
📍 पाठक किसी संदिग्ध या नियमविहीन हॉस्पिटल की सूचना देकर इस अभियान में सहयोग कर सकते हैं।

AKP NEWS 786
जब भी देखे, सच देखे