बस्ती – पुरानी बस्ती स्थित मीनारा मस्जिद में रमज़ान की बरकतों के बीच तरावीह की नमाज़ के दौरान एक मुकम्मल क़ुरआन पाक ख़त्म किया गया। इस मुबारक मौके पर मस्जिद का माहौल पूरी तरह रूहानी नूर से सराबोर नजर आया।

हाफ़िज़ व क़ारी मोहम्मद असलम क़ादरी साहब ने पूरे ख़ुशू-ओ-ख़ुज़ू और दिलकश लहजे में क़ुरआन पाक की तिलावत की। उनकी असरदार आवाज़ और बेहतरीन अंदाज़ ने नमाज़ियों के दिलों को झंकृत कर दिया। तिलावत के दौरान मस्जिद में सुकून, अदब और इबादत का ख़ास माहौल देखने को मिला।
हाफ़िज़ व कारी मोहम्मद असलम क़ादरी साहब ने कहा आज एक क़ुरआन पाक अल्लाह पाक की रहमत से मोकम्मल हुआ है, तरावी की नमाज़ पूरा रमजान पढ़ना चाहिए! रमजान का चाँद देखने से ईद की चाँद देखने तक तरावी की नमाज़ पढ़ी जाती है इसलिए मस्जिद को आबाद रखे और छोटी तरावी में भी शामिल हो!
कार्यक्रम के सफल आयोजन में मस्जिद कमेटी की अहम भूमिका रही। सेक्रेटरी नवाब अली, नायब सेक्रेटरी अब्दुल अली और सदर मोहम्मद रज़ा ने बेहतरीन इंतज़ामात सुनिश्चित किए, जिससे बड़ी तादाद में पहुंचे मुक़ामी लोगों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
तरावीह में क्षेत्र के लोगों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। नमाज़ के बाद मुल्क व मिल्लत की सलामती, अमन-ओ-अमान और आपसी भाईचारे के लिए ख़ास दुआ की गई।
रमज़ान के इस पाक महीने में क़ुरआन पाक का मुकम्मल होना न सिर्फ मस्जिद कमेटी बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और ख़ुशी का विषय बना रहा। दुआ की गई कि अल्लाह तआला हम सबको क़ुरआन की तालीमात पर चलने और उसे अपनी ज़िंदगी में उतारने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।
