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2 Mar 2026, Mon

नम आंखों के बीच सुपुर्द-ए-खाक हुए मुख्तार अहमद सिद्दीकी, गोरखपुर में उमड़ा शोक का सैलाब

मुख्तार अहमद सिद्दीकी

By Aijaz Alam Khan


गोरखपुर में शोक की लहर, अंतिम विदाई में जुटे सैकड़ों लोग
गोरखपुर। शहर के सामाजिक और धार्मिक हलकों में उस समय गहरा शोक फैल गया जब हजरत बाबा मुबारक खां शहीद रहमतुल्लाह अलैह दरगाह कमेटी के अध्यक्ष इकरार अहमद के पिता मुख्तार अहमद सिद्दीकी का इंतकाल हो गया। गुरुवार को बाद नमाज उनके जनाजे की नमाज अदा की गई और मुबारक खां शहीद कब्रिस्तान में नम आंखों के बीच उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।


जनाजे में समाज के हर तबके के लोग शामिल हुए। धार्मिक, सामाजिक और पत्रकारिता जगत से जुड़ी हस्तियों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण थी कि मरहूम अपने पीछे कितनी गहरी छाप छोड़ गए हैं।
सरल जीवन और मजबूत उसूलों के लिए पहचाने जाते थे
मुख्तार अहमद सिद्दीकी को एक बेहद सादा जीवन जीने वाले, मिलनसार और उसूलों पर चलने वाले इंसान के रूप में जाना जाता था। वे कभी दिखावे में विश्वास नहीं रखते थे और हमेशा खामोशी से समाज की भलाई के कामों में जुड़े रहते थे।
उनका व्यवहार इतना सहज था कि जो भी एक बार उनसे मिलता, हमेशा के लिए उनका हो जाता। वे बड़ों का अदब और छोटों से मोहब्बत का जीता-जागता उदाहरण थे।


खैरूल बशर ने बताया व्यक्तिगत क्षति


इमामचौक मुतवल्ली एक्शन कमेटी के संरक्षक एवं वरिष्ठ काउन्सलर खैरुल बशर ने मरहूम मुख्तार अहमद सिद्दीकी के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सामाजिक शख्सियत का जाना नहीं है, बल्कि उनके लिए यह एक व्यक्तिगत क्षति है।
खैरुल बशर ने कहा कि मुख्तार साहब जब भी मिलते थे, बेहद खूलुस और अपनापन झलकता था। उनका इस तरह अचानक दुनिया से चले जाना सभी को भीतर तक झकझोर गया है। उनकी यादें उनके व्यक्तिगत जीवन में हमेशा जीवित रहेंगी।

मुर्तजा हुसैन रहमानी ने दी खिराज-ए-अकीदत


सामाजिक योद्धा और वरिष्ठ पत्रकार मुर्तजा हुसैन रहमानी ने मुख्तार अहमद सिद्दीकी को खिराज-ए-अकीदत पेश करते हुए कहा कि उनका जीवन सादगी और नैतिक मूल्यों से भरा हुआ था।
उन्होंने कहा कि मुख्तार साहब से उनका भावनात्मक रिश्ता रहा है। वे ऐसे इंसान थे जो बिना बोले बहुत कुछ सिखा जाते थे। रहमानी ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मरहूम की मगफिरत के लिए दुआ की।

जनाजे में उमड़ी भीड़ बनी उनकी लोकप्रियता का प्रमाण


मरहूम मुख्तार अहमद सिद्दीकी के जनाजे में भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण थी कि वे समाज में कितने लोकप्रिय और सम्मानित थे। हर आंख नम थी और हर जुबां पर उनके लिए दुआएं थीं।
लोगों का कहना था कि ऐसे लोग बहुत कम होते हैं जो बिना किसी पद या प्रचार के लोगों के दिलों में जगह बना लेते हैं।

इकरार अहमद को मिला समाज का साथ


दरगाह कमेटी के अध्यक्ष इकरार अहमद को इस दुख की घड़ी में समाज का भरपूर सहारा मिला। लोगों ने कहा कि जैसे इकरार अहमद हमेशा दूसरों के दुख-सुख में खड़े रहते हैं, वैसे ही आज समाज उनके साथ मजबूती से खड़ा नजर आया।
यह उनके पिता मुख्तार अहमद सिद्दीकी की परवरिश और संस्कारों का ही असर है कि बेटा भी समाजसेवा की उसी राह पर चल रहा है।

हमेशा याद किए जाएंगे मुख्तार साहब


मुख्तार अहमद सिद्दीकी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके संस्कार, उनका व्यवहार और उनकी यादें हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगी। गोरखपुर ने एक ऐसा शख्स खो दिया है जिसकी भरपाई आसान नहीं है।
अल्लाह से दुआ है कि वह मरहूम मुख्तार अहमद सिद्दीकी को जन्नत-उल-फिरदौस में आला मकाम अता फरमाए और शोक संतप्त परिवार को सब्र-ए-जमील अता करे।

रिपोर्ट रिजवान खान

AKP News 786