वशिष्ठ रामायण कथा विश्राम दिवस पर सांस्कृतिक संध्या, कथक और संगीत से सजा भव्य मंच
वशिष्ठ रामायण कथा के विश्राम दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से माहौल को भक्तिमय और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर कला, भक्ति और भारतीय परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में कथक, शास्त्रीय संगीत और भक्ति गीतों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कथक परंपरा की गौरवशाली झलक
कार्यक्रम में विश्व विख्यात कथक सम्राट, पद्म विभूषण पंडित बिरजू जी महाराज के परपौत्र, कथक गुरु पंडित अर्जुन जी महाराज के सुपुत्र पंडित अनुज मिश्रा जी की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा का अनुभव कराया।
पंडित अनुज मिश्रा जी को पूर्व में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां सम्मान, श्रृंगार मणि-सुर सिंगार शमशाद (मुंबई), भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वर्ण पदक 2003, प्रथम स्थान अंतर्राष्ट्रीय नृत्य प्रतियोगिता तथा आचार्य देव आर्ट फाउंडेशन, न्यूयॉर्क 2004 जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उनकी प्रस्तुति में भाव, लय और ताल का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
वशिष्ठ धाम को विश्व पटल पर लाने की अपील
नेहा सिंह, लखनऊ ने वशिष्ठ धाम की महिमा का बखान करते हुए कहा कि यह धाम आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस धाम को विश्व पटल पर लाने के लिए संगठित प्रयास होने चाहिए और यहां निरंतर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की परंपरा प्रारंभ की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं।
भक्ति संगीत से गूंजा मंच
कार्यक्रम में बॉलीवुड प्लेबैक सिंगर नीरज तिवारी ने भी अपनी प्रस्तुति दी। उन्हें मुंबई महाराष्ट्र सम्मान, वर्सोवा महोत्सव सम्मान और ‘इंडिया रिस्पेक्ट चाहता है’ रिपब्लिक डे सॉन्ग जैसे सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उन्होंने अपने भक्ति गीतों के माध्यम से वशिष्ठ राम कथा मंच के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
नीरज तिवारी ने कहा कि वशिष्ठ राम कथा का यह मंच उनके लिए विश्व का सबसे बड़ा मंच था। उन्होंने इसे आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण बताते हुए आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उनकी मधुर आवाज ने पूरे वातावरण को भक्ति रस में डुबो दिया।
आयोजन की सफलता में टीम का योगदान
सांस्कृतिक कार्यक्रम के प्रभारी कथक गुरु मास्टर शिव ने आदरणीय राणा दिनेश प्रताप सिंह भैया को नमन करते हुए कहा कि उन्हें जो दायित्व सौंपा गया था, उसका निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ किया गया। उन्होंने बताया कि दिन-रात एक कर कथा और सांस्कृतिक कार्यक्रम को पूर्ण रूप से सफल और भव्य बनाने का प्रयास किया गया।
मास्टर शिव ने कहा कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने सभी कलाकारों, आयोजकों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह आयोजन ऐतिहासिक बन सका।
भक्ति और संस्कृति का संगम
वशिष्ठ रामायण कथा के विश्राम दिवस पर आयोजित यह सांस्कृतिक संध्या भक्ति और कला का अद्भुत उदाहरण रही। कथक की मनमोहक प्रस्तुतियां, भक्ति संगीत की मधुर धुनें और संतों के आशीर्वचन ने पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया।
उपस्थित श्रद्धालुओं ने आयोजन की भव्यता और अनुशासन की सराहना की। इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब धर्म और संस्कृति का संगम होता है, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संचार होता है।
आयोजकों ने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता बनाए रखने का संकल्प व्यक्त किया, ताकि वशिष्ठ धाम राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर सके।
रिपोर्ट : रिजवान खान
