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2 Mar 2026, Mon

विश्व हिन्दी दिवस संगोष्ठी में विमर्श, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेतु का काम कर रही है हिन्दी : डा. वी.के. वर्मा

By Aijaz Alam Khan

बस्ती में आयोजित विश्व हिन्दी दिवस संगोष्ठी में वक्ताओं को संबोधित करते डा. वी.के. वर्मा

विश्व हिन्दी दिवस संगोष्ठी में विमर्श, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेतु का काम कर रही है हिन्दी

बस्ती: वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर स्थित शिविर कार्यालय में विश्व हिन्दी दिवस संगोष्ठी का आयोजन किया गया। समिति के महामंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा के संयोजन में आयोजित इस संगोष्ठी में हिंदी भाषा के वैश्विक महत्व और वर्तमान भूमिका पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक एवं साहित्यकार डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि हिंदी भाषा को सम्मान दिलाने और उसे वैश्विक पहचान देने के उद्देश्य से हर वर्ष विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि जहां राष्ट्रीय हिंदी दिवस से लोग परिचित हैं, वहीं विश्व हिन्दी दिवस संगोष्ठी के माध्यम से हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सशक्त बनाने का संदेश दिया जाता है।

डा. वर्मा ने कहा कि 10 जनवरी 1975 को नागपुर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ था, जिसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। उसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। आज हिंदी केवल साहित्य या संवाद की भाषा नहीं रह गई है, बल्कि तकनीक, कोडिंग, डिजिटल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है।

वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी केवल बोलचाल या लेखन की भाषा नहीं, बल्कि यह करोड़ों लोगों की भावनाओं और संस्कृति को जोड़ने वाला माध्यम है। भारत में सैकड़ों भाषाएं और बोलियां हैं, लेकिन सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा हिंदी है। विश्व हिन्दी दिवस संगोष्ठी के माध्यम से इस एकता को और मजबूत किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के लिए हिंदी एक सांस्कृतिक सेतु का कार्य करती है। वर्ष 2026 में विश्व हिंदी दिवस की थीम “हिंदी पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक” रखी गई है, जो हिंदी के बदलते स्वरूप और आधुनिक उपयोग को दर्शाती है।

गोष्ठी को वरिष्ठ कवि डा. राम कृष्ण ‘जगमग’, बी.के. मिश्र, बटुक नाथ शुक्ल, रामदत्त जोशी, जगदम्बा प्रसाद ‘भावुक’, तौव्वाब अली, सुशील सिंह पथिक और पेशकार मिश्र ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि विश्व हिंदी दिवस को आधिकारिक रूप से मनाने की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

इसके बाद से विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और सांस्कृतिक केंद्रों में भी इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाने लगे। विश्व हिन्दी दिवस संगोष्ठी का उद्देश्य हिंदी को वैश्विक संवाद की भाषा के रूप में स्थापित करना है।

कार्यक्रम में सामईन फारूकी, नेबूलाल, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, ओम प्रकाश धर द्विवेदी, कृष्णचन्द्र पाण्डेय, अफजल हुसेन अफजल, गणेश प्रसाद, दीननाथ यादव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर वक्ताओं ने हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करने और आने वाली पीढ़ी को हिंदी से जोड़ने का संकल्प लिया।

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