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2 Mar 2026, Mon

सवित्रीबाई फुले जयंती पर समाजवादियों का नमन: संगठन की मजबूती और शिक्षा के संघर्ष का संकल्प

सवित्रीबाई फुले जयंती पर समाजवादियों का नमन: संगठन की मजबूती और शिक्षा के संघर्ष का संदेश

By Aijaz Alam Khan

बस्ती: भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारक और कवयित्री सवित्रीबाई फुले जयंती के अवसर पर शनिवार को समाजवादी पार्टी कार्यालय में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। कार्यक्रम के दौरान उनके शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के संघर्षों को नमन करते हुए संगठन की मजबूती पर विशेष जोर दिया गया।

बालिकाओं के लिए शिक्षा का द्वार खोला: महेन्द्रनाथ यादव

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सपा जिलाध्यक्ष एवं बस्ती सदर विधायक महेन्द्रनाथ यादव ने कहा कि सवित्रीबाई फुले ने 19वीं सदी में उस दौर में शिक्षा की अलख जगाई, जब लड़कियों की शिक्षा को पाप माना जाता था। उन्होंने महिलाओं और दलित समाज के लिए शिक्षा का द्वार खोलकर सामाजिक क्रांति की नींव रखी।

उन्होंने कहा कि सवित्रीबाई फुले ने अपने पति महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर वर्ष 1848 में पुणे में देश का पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया। यह कदम उस समय के सामाजिक ढांचे के लिए एक साहसिक चुनौती था। सवित्रीबाई फुले जयंती हमें उनके इसी साहस और संकल्प को याद करने का अवसर देती है।

महिला अधिकारों और सामाजिक सुधार की अग्रदूत

महेंद्रनाथ यादव ने कहा कि सवित्रीबाई फुले ने केवल शिक्षा तक ही सीमित न रहते हुए विधवा पुनर्विवाह, बाल विवाह के विरोध और महिला अधिकारों के लिए भी संघर्ष किया। उन्होंने जाति, धर्म और लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव का खुलकर विरोध किया। उनका योगदान भारतीय समाज के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।

संगठन की मजबूती पर दिया गया जोर

समाजवादी पार्टी की मासिक बैठक के दौरान सवित्रीबाई फुले जयंती पर उन्हें नमन करने के साथ-साथ संगठनात्मक विषयों पर भी गंभीर चर्चा की गई। बैठक में मतदाता सूची को नए सिरे से जांचने, बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और जनहित से जुड़ी समस्याओं को लेकर संघर्ष तेज करने का आह्वान किया गया।

पत्थरों और अपमान के बीच भी नहीं रुकी शिक्षा की मशाल

पूर्व विधायक राजमणि पाण्डेय, विधायक राजेन्द्र चौधरी, कविन्द्र चौधरी ‘अतुल’, जिला उपाध्यक्ष समीर चौधरी सहित अन्य नेताओं ने कहा कि सवित्रीबाई फुले का जीवन हमें सिखाता है कि दृढ़ संकल्प से पूरे समाज को बदला जा सकता है।

वक्ताओं ने कहा कि सवित्रीबाई फुले को जब पढ़ाने के लिए घर से निकलना पड़ता था, तब उन्हें पत्थर, कीचड़ और गालियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन उन्होंने कभी शिक्षा देना नहीं छोड़ा। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि सफलता के मार्ग में आने वाली कठिनाइयों से डरना नहीं चाहिए।

समानता, शिक्षा और साहस का प्रतीक

नेताओं ने कहा कि सवित्रीबाई फुले जयंती केवल श्रद्धांजलि का दिन नहीं, बल्कि समानता, शिक्षा और साहस से भरे जीवन मूल्यों को अपनाने का अवसर है। उन्होंने समाजवादी विचारधारा को सवित्रीबाई फुले के संघर्षों से जोड़ते हुए कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

इन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम में मुख्य रूप से राजेन्द्र यादव, अरविन्द सोनकर, मुरलीधर पाण्डेय, राम प्रकाश सुमन, जगदीश यादव, नितराम चौधरी, अकबर अली, वीरेन्द्र यादव, जोखूलाल यादव, रोहिताश्व सिंह ‘नीलू’, विजय लक्ष्मी, राधा देवी, तूफानी यादव, पंकज निषाद, मो. युनुस आलम, भोला पाण्डेय, रजवन्त यादव, कैश मोहम्मद, रणजीत यादव, मो. हारिश, सुशील यादव, अमित गौड़, अशोक यादव, प्रशान्त यादव, दिनेश तिवारी, जितेन्द्र यादव, हनुमान प्रसाद चौधरी, श्याम यादव, रामशंकर निराला, बदरूल हसन, रजनीश यादव, गौरीशंकर यादव, रामभवन यादव, हृदयराम यादव, घनश्याम यादव, अंकित यादव सहित सपा के अनेक नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

आज भी प्रासंगिक है सवित्रीबाई फुले का संदेश

सवित्रीबाई फुले जयंती हमें यह संकल्प लेने की प्रेरणा देती है कि शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाए। उनका जीवन संघर्ष, साहस और सामाजिक चेतना की मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव मार्गदर्शन देता रहेगा।

रिपोर्ट रिजवान खान

AKP News 786