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2 Mar 2026, Mon

सावित्रीबाई फुले जयंती पर नमन: शिक्षा और नारी उत्थान की मिसाल बनीं देश की प्रथम महिला शिक्षिका

सावित्रीबाई फुले जयंती पर नमन: शिक्षा की मशाल जलाने वाली प्रथम महिला शिक्षिका

By Aijaz Alam Khan

बस्ती: देश की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले जयंती के अवसर पर शनिवार को उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। जन अधिकार पार्टी के जिलाध्यक्ष राम आशीष मौर्य के संयोजन में प्रेस क्लब सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा, सामाजिक समानता और महिला सशक्तिकरण पर विस्तार से चर्चा की गई।

शिक्षा सभी का अधिकार: शिवाजी कुशवाहा

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंडल प्रभारी शिवाजी कुशवाहा ने कहा कि भारत में शिक्षा पाना सभी नागरिकों का मौलिक अधिकार है, लेकिन इतिहास गवाह है कि समाज के कई वर्ग लंबे समय तक इससे वंचित रहे। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा पाने के लिए सामाजिक विरोध और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।

शिवाजी कुशवाहा ने कहा कि सावित्रीबाई फुले जयंती केवल एक तिथि नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति का प्रतीक है। सावित्रीबाई फुले ने स्वयं संघर्षों के बीच शिक्षा ग्रहण की और फिर समाज की अन्य बेटियों के लिए शिक्षा के द्वार खोले। उनके बिना देश की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक उत्थान की कल्पना अधूरी है।

गोबर और पत्थरों के बीच जली शिक्षा की लौ

विशिष्ट अतिथि कुलदीप मौर्य (जिला प्रभारी, सिद्धार्थनगर) और रामसूरत मौर्य (जिलाध्यक्ष, संत कबीर नगर) ने कहा कि जब सावित्रीबाई फुले पुणे में बालिकाओं को पढ़ाने स्कूल जाती थीं, तब स्त्री शिक्षा के विरोधी उन पर गोबर फेंकते और पत्थर मारते थे।

उन्होंने बताया कि सावित्रीबाई फुले प्रतिदिन अपने बैग में अतिरिक्त साड़ी लेकर जाती थीं और स्कूल पहुँचने के बाद अपनी साड़ी बदलती थीं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उस दौर में लड़कियों के लिए स्कूल खोलना एक क्रांतिकारी कदम था, जब बालिका शिक्षा को समाज स्वीकार नहीं करता था।

मराठी की आदिकवयित्री और समाज सुधारक

वक्ताओं ने कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल शिक्षिका ही नहीं, बल्कि मराठी भाषा की आदिकवयित्री भी थीं। उन्होंने अपनी कविताओं और लेखन के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य किया। बालिका शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह और सामाजिक समानता के लिए उनका योगदान अतुलनीय है।

सावित्रीबाई फुले जयंती हमें यह याद दिलाती है कि शिक्षा ही सामाजिक बदलाव का सबसे मजबूत माध्यम है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

जन अधिकार पार्टी के जिलाध्यक्ष राम आशीष मौर्य ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए कहा कि सावित्रीबाई फुले आज भी प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। नई पीढ़ी को उनके जीवन संघर्षों से सीख लेनी चाहिए और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर समाज के लिए योगदान देना चाहिए।

कार्यक्रम में रहे ये लोग उपस्थित

इस अवसर पर झिनकान मौर्य, अभिषेक मौर्य, पंचराम मौर्य, विकास गौतम, अखिलेश प्रजापति, रामदेव मौर्य, साधु शरण गौतम, दीपक कनौजिया, ओम प्रकाश मौर्य, अजय मौर्या, सुनील मौर्य, मनोज मौर्य, राघव सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

सावित्रीबाई फुले का संदेश आज भी प्रासंगिक

सावित्रीबाई फुले जयंती हमें यह संकल्प लेने का अवसर देती है कि हम शिक्षा को हर वर्ग और हर बेटी तक पहुँचाएँगे। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस दौर में थे।

शिक्षा, समानता और साहस — यही सावित्रीबाई फुले की सच्ची विरासत है।

रिपोर्ट रिजवान खान

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