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2 Mar 2026, Mon

India Rupee Falls Past 90: Big Indian Rupee Crash Shakes Market

India Rupee Falls

India Rupee Falls Past 90 as Outflows Batter Asian Laggard, Central Bank Staggers Defence

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक और चिंता बढ़ाने वाला साबित हुआ, जब Indian Rupee Crash ने एक नया रिकॉर्ड बना दिया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 90 के पार फिसल गया। यह स्तर भारतीय मुद्रा के लिए अब तक का सबसे कमजोर स्तर है और एशिया की प्रमुख करेंसीज़ में भारत को सबसे ज़्यादा दबाव में दिखाने वाला बन गया है।

India Rupee Falls

रुपये में यह गिरावट अचानक नहीं आई। पिछले कई हफ्तों से वैश्विक बाज़ारों में अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है, जबकि एशियाई देशों में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली देखने को मिली है। भारत भी इस दबाव से अछूता नहीं है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) नवंबर और दिसंबर में लगातार भारतीय बाज़ारों से पैसा निकाल रहे हैं। इसी तेज़ आउटफ्लो ने रुपये पर और प्रेशर बढ़ा दिया।

India Rupee Falls

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली

नवंबर 2025 से अब तक FPI कुल मिलाकर अरबों डॉलर की पूंजी भारतीय मार्केट से निकाल चुके हैं। बड़ी टेक कंपनियों, बैंकिंग सेक्टर और मेटल सेक्टर में भारी बिकवाली हुई है। जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर और बॉन्ड बेचते हैं, तो उन्हें अपने पैसे वापस भेजने के लिए डॉलर की ज़रूरत होती है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।

एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री के मुताबिक:
“रुपया लंबे समय से दबाव में था। Outflows और मजबूत डॉलर ने मिलकर इस Indian Rupee Crash को ट्रिगर किया।”

India Rupee Falls

एशिया का सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला करेंसी

एशियाई बाज़ारों में थाई बाहत, दक्षिण कोरियाई वॉन, और जापानी येन पर भी दबाव है। लेकिन भारतीय रुपये की गिरावट ने इसे क्षेत्र में सबसे पीछे दिखा दिया है। बड़े देश होने के कारण इसका असर न सिर्फ भारतीय बाजार पर बल्कि एशियाई ट्रेडिंग सेंटीमेंट पर भी पड़ा है।

🔻 क्या RBI ने दखल दिया?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने गिरावट को संभालने के लिए हस्तक्षेप करने की कोशिश की, लेकिन यह दखल भी ज्यादा असरदार नहीं रहा। बाज़ार रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI ने डॉलर बिक्री के जरिए रुपये को सपोर्ट देने की कोशिश की, लेकिन भारी आउटफ्लो और मजबूत डॉलर के आगे यह बचाव सीमित साबित हुआ।

विशेषज्ञों के अनुसार यह “staggered defence” था—यानी RBI पूरी ताकत से दखल नहीं देना चाहता क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) जल्दी गिर सकता है।
इसलिए RBI सिर्फ उतनी ही मात्रा में मदद कर रहा है, जिससे बाज़ार में अचानक कोई चोट ना लगे।

डॉलर क्यों इतना मजबूत है?

चार मुख्य कारण हैं:
1️⃣ अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने की उम्मीद
2️⃣ अमेरिकी अर्थव्यवस्था का बाकी दुनिया से बेहतर प्रदर्शन
3️⃣ ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितता में “safe haven” की ओर भागना
4️⃣ चीन और एशिया की धीमी रिकवरी

इन सबने डॉलर को मजबूती दी है — और यही Indian Rupee Crash का बड़ा कारण है।

रुपये की गिरावट का आम आदमी पर असर

जब भारतीय रुपये में भारी गिरावट आती है, तो इसका असर हर क्षेत्र पर पड़ता है:

Import महंगे
पेट्रोल-डीजल, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कच्चा तेल — सबकी कीमतें बढ़ने का खतरा।

विदेश में पढ़ाई और यात्रा महंगी
विदेश में पैसे भेजने की लागत बढ़ जाती है।

महंगाई बढ़ने का खतरा
सरकार और RBI को मुद्रास्फीति रोकने में दिक्कत हो सकती है।

EMI महंगी हो सकती है
अगर RBI महंगाई रोकने के लिए ब्याज दरें बढ़ाए।

आगे क्या हो सकता है?

अर्थशास्त्री मानते हैं कि अगर FPI आउटफ्लो जारी रहा और अमेरिका की ब्याज दरों में कटौती जल्द नहीं हुई, तो रुपये में गिरावट कुछ समय के लिए बनी रह सकती है।
हालांकि RBI के पास अभी भी पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है और जरूरत पड़ने पर वह रुपये को 90–92 स्तर पर स्थिर कर सकता है।

फ़िलहाल बाज़ार में डर और अनिश्चितता दोनों जारी हैं, और निवेशकों की नज़र अब RBI की अगली चाल और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के बयान पर होगी।

AKP News 786