India’s delayed action plan को लेकर COP30 क्लाइमेट समिट में नई बहस छिड़ गई है। जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक मंच पर भारत की ओर से देरी से पेश किए गए एक्शन प्लान ने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को हैरान किया है।समिट में मौजूद विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का अपडेटेड

क्लाइमेट रोडमैप अपेक्षित समय से काफी देर बाद जमा किया गया, जिससे कई वैश्विक समीक्षाएं और चर्चा योजनाएँ प्रभावित हुईं।COP30 की प्रमुख बैठकों में यह मुद्दा गर्माया रहा कि क्या भारत अपनी नेट-जीरो रणनीति, नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार और कार्बन उत्सर्जन कटौती के लक्ष्यों पर समयबद्ध प्रगति दिखा पाएगा। कुछ देशों ने इसे “अस्पष्ट और अनिश्चित” बताते हुए अधिक पारदर्शिता की मांग की है।हालाँकि, भारत के प्रतिनिधियों ने अपने पक्ष में कहा कि देश दुनिया की सबसे बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और बड़े पैमाने पर नीतिगत बदलावों को लागू करने में समय लगता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत ने अभी तक सभी प्रमुख जलवायु लक्ष्यों पर सकारात्मक प्रगति की है—जिसमें सौर ऊर्जा क्षमता, हरित हाइड्रोजन मिशन और कार्बन-क्रेडिट मैकेनिज़्म शामिल हैं।अब वैश्विक नज़रें COP30 के अगले दौर की चर्चाओं पर हैं, जहाँ यह साफ होगा कि भारत अपने संशोधित एक्शन प्लान में किस तरह के नए और प्रभावी कदम जोड़ता है।
