SIR Form Controversy संपादकीय एजाज़ आलम खान संपादक AKP News 786 की ओर से हाल के दिनों में निर्वाचन आयोग द्वारा जारी SIR फ़ॉर्म को लेकर समाज में अनावश्यक भय और भ्रम का वातावरण बन गया है। कुछ लोग यह गलतफ़हमी फैला रहे हैं कि 2003 की मतदाता सूची में नाम न होने पर किसी की नागरिकता खतरे में पड़ सकती है।

सोशल मीडिया पर भी इस तरह की भ्रामक सूचनाएँ तेजी से फैल रही हैं, जिससे आमजन में संशय बढ़ रहा है।
सबसे पहले यह बात बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए कि भारत में नागरिकता किसी फ़ॉर्म से तय नहीं होती और न ही किसी निर्वाचन सूची के आधार पर समाप्त की जा सकती है। यह अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है और इसे छीनने का अधिकार किसी प्रशासनिक प्रक्रिया के पास नहीं है।
इसलिए SIR फ़ॉर्म को नागरिकता से जोड़ना न सिर्फ़ गलत है, बल्कि जनता को डराने का एक गैर-ज़िम्मेदाराना प्रयास भी है।वास्तव में SIR फ़ॉर्म सिर्फ़ एक तकनीकी और नियमित चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और पारदर्शी बनाना है। इस फ़ॉर्म की मदद से तीन महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं—फर्जी मतदाताओं की पहचानमृतक व्यक्तियों के नाम सूची से हटानानए या वंचित पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करनाये सभी प्रक्रियाएँ देश की चुनावी व्यवस्था को मजबूत करती हैं, न कि किसी की नागरिकता पर सवाल उठाती हैं।दुर्भाग्य यह है कि कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैलाकर जनता को डरा रहे हैं।
यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गंभीर उदासीनता दर्शाता है, बल्कि समाज में अनावश्यक तनाव भी पैदा करता है।लोकतंत्र में गलत सूचना सबसे बड़ा खतरा है, और इसे रोकना हम सभी की जिम्मेदारी है।
AKP News 786 अपने पाठकों से अपील करता है
➡ अफ़वाहों से दूर रहें।
➡ आधिकारिक तथ्यों पर भरोसा करें।
➡ सत्य को पहचानें और फैलाएँ
SIR फ़ॉर्म नागरिकता की जांच नहीं, बल्कि आपके मताधिकार को सुरक्षित और मजबूत करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब नागरिक जागरूक हों, और जागरूकता हमेशा सही जानकारी से आती है
एजाज़ आलम खान
संपादक
AKP News 786
