Tata Trusts row को लेकर नया विवाद तब गहराया जब वरिष्ठ वकील Darius Khambata ने हाल ही में दिए अपने बयान में “coup” यानी सत्ता हथियाने के नैरेटिव को पूरी तरह बेतुका और तथ्यहीन बताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ट्रस्ट में जिस तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, उनका किसी वास्तविक स्थिति से कोई संबंध नहीं है। साथ ही, उन्होंने Noel Tata की लीडरशिप और विज़न की खुलकर प्रशंसा की।

खांबाटा ने कहा कि Noel Tata का नेतृत्व बिल्कुल पारदर्शी, मजबूत और ट्रस्ट की दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों द्वारा यह नैरेटिव फैलाया जा रहा है कि ट्रस्ट में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अंदरूनी ‘कू’ हो रहा है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है।यह विवाद Tata Trusts के भीतर हाल के बोर्ड निर्णयों और नेतृत्व से जुड़े कयासों के चलते उभरा। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि Noel Tata के प्रभाव बढ़ने से समूह के भीतर असहजता है। खांबाटा का बयान इसी संदर्भ में आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के कार्यों में कोई भी अस्थिरता या शक्ति संघर्ष मौजूद नहीं है।उन्होंने यह भी जोड़ा कि ट्रस्ट की दिशा, सामाजिक पहलों और दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए Noel Tata का नेतृत्व बिल्कुल उपयुक्त है और इसे “किसी भी नकारात्मक व्याख्या से जोड़ना अनुचित” है।विवाद पर आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा जारी है, लेकिन खांबाटा के बयान ने इस मुद्दे पर नया दृष्टिकोण पेश कर दिया है, जिससे ट्रस्ट की स्थिरता और नेतृत्व क्षमता पर भरोसा मज़बूत होता दिखाई दे रहा है।
