Breaking
2 Mar 2026, Mon

आज़ाद हिन्द फ़ौज की गूंज महुआ डाबर में, नेताजी जयंती पर ऐतिहासिक आयोजन

By Aijaz Alam Khan

डाबर क्रांतिस्थल पर इतिहास, सेवा और संवाद का संगम
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पर महुआ डाबर में ऐतिहासिक आयोजन
बस्ती। स्वतंत्रता संग्राम के स्वर्णिम अध्यायों को सजीव करने वाले डाबर क्रांतिस्थल, महुआ डाबर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर एक भव्य, गरिमामय और उद्देश्यपूर्ण आयोजन संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित विविध कार्यक्रमों ने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों को ताज़ा किया, बल्कि समाज सेवा, इतिहास बोध और जनसंवाद के माध्यम से नई पीढ़ी को राष्ट्रनिर्माण की चेतना से जोड़ने का सशक्त प्रयास किया।


कार्यक्रमों की श्रृंखला का शुभारंभ प्रातः 11:00 बजे निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर से हुआ। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव निगम के नेतृत्व में अमित मणि पांडेय एवं उनकी चिकित्सकीय टीम द्वारा आयोजित इस शिविर में सैकड़ों ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। शिविर में रक्तचाप, शुगर, सामान्य रोगों की जांच के साथ-साथ विशेषज्ञ परामर्श और निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण क्षेत्र में इस प्रकार की स्वास्थ्य सेवा ने सेवा भाव और सामाजिक उत्तरदायित्व का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे नेताजी के सेवा और त्याग के विचारों से प्रेरित बताया।


दोपहर 2:00 बजे आयोजन का दूसरा चरण शुरू हुआ, जिसमें अतिथियों और प्रतिभागियों ने महुआ डाबर क्रांतिस्थल एवं संग्रहालय का भ्रमण किया। संग्रहालय में संरक्षित दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेज, क्रांतिकारियों के चित्र, स्मृतिचिह्न और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े साक्ष्य उपस्थित जनसमूह के लिए आकर्षण का केंद्र रहे।

इन ऐतिहासिक धरोहरों को देखकर उपस्थित लोगों ने न केवल अतीत को महसूस किया, बल्कि स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्षों और बलिदानों के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की। यह भ्रमण युवाओं के लिए इतिहास को पुस्तकों से बाहर निकालकर प्रत्यक्ष अनुभव के रूप में समझने का अवसर बना।


दोपहर 3:00 बजे महुआ डाबर तिराहा पर आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम ने आयोजन को वैचारिक ऊंचाई प्रदान की। “आज़ाद हिन्द फ़ौज और बस्ती” विषय पर आयोजित इस संवाद के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. वीरेंद्र श्रीवास्तव रहे। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के क्रांतिकारी विचारों, आज़ाद हिन्द फ़ौज की भूमिका और उसके राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. श्रीवास्तव ने अपने 30 वर्षों के शोध और लेखन अनुभव साझा करते हुए बस्ती जनपद के क्रांतिकारियों के योगदान को रेखांकित किया और महुआ डाबर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थान दिलाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि इस ऐतिहासिक स्थल का समुचित संरक्षण और प्रचार किया जाए, तो यह न केवल पर्यटन बल्कि राष्ट्रीय चेतना के केंद्र के रूप में उभर सकता है।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आज़मगढ़ निवासी शेख जावेद नवाब, जो 1857 के महानायक अमर शहीद शेख रज्जब अली के प्रपौत्र हैं, ने अपने उद्बोधन में कहा कि महुआ डाबर जैसी क्रांतिकारी धरती युवाओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से इतिहास केवल स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य का मार्गदर्शक बनता है। उनके वक्तव्य ने उपस्थित युवाओं में विशेष उत्साह और गर्व की भावना भर दी।


इस अवसर पर डॉ. रितेश आर्य, महेश कुमार, गौहर अली, विनय कुमार सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी अपने विचार रखे और नेताजी के आदर्शों को आज के सामाजिक और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिक बताया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि नेताजी का जीवन साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम की मिसाल है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।


कार्यक्रम का कुशल संचालन क्रांतिकारी लेखक एवं महुआ डाबर के निदेशक डॉ. शाह आलम राणा ने किया। उन्होंने आयोजन की पृष्ठभूमि, उद्देश्य और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए सभी अतिथियों और सहभागियों का आभार व्यक्त किया। आयोजन की सफलता में फकीर मोहम्मद खान, अतुल सिंह, मोहम्मद कैफ, रामकेश गौतम, मोहम्मद रईस सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं का उल्लेखनीय योगदान रहा।
कुल मिलाकर, डाबर क्रांतिस्थल पर आयोजित यह कार्यक्रम इतिहास, सेवा और संवाद का ऐसा संगम बना, जिसने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ समाज को राष्ट्रप्रेम, सेवा और जागरूकता का संदेश दिया।