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2 Mar 2026, Mon

बस्ती पॉक्सो केस सजा: ऑपरेशन कन्विक्शन में 1 को 10 साल, 2 को 3 साल की कैद

By Aijaz Alam Khan

बस्ती पॉक्सो केस सजा: ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत अदालत का सख्त फैसला

बस्ती। जनपद बस्ती में “ऑपरेशन कन्विक्शन” के अंतर्गत पैरवी सेल एवं थाना परसरामपुर पुलिस की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक गंभीर मामले में माननीय न्यायालय ने अभियुक्तों को कठोर दंड से दंडित किया है। इस फैसले को बस्ती पॉक्सो केस सजा के रूप में अहम माना जा रहा है।

दिनांक 26 अक्टूबर 2016 को वादिनी द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर थाना परसरामपुर में मु0अ0सं0 1335/2016 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376, 506, 306 एवं 5/6 पॉक्सो एक्ट से संबंधित था।

तीन अभियुक्तों के विरुद्ध दर्ज हुआ था मामला

पंजीकृत मुकदमे में अभियुक्त 1. इकबाल पुत्र स्वर्गीय मोती, अभियुक्त 2. प्यारी पत्नी स्वर्गीय मोती तथा अभियुक्त 3. सफीक पुत्र सैम मुहम्मद, निवासीगण बनगवा ननका, थाना भवानीगंज, जनपद सिद्धार्थनगर के नाम शामिल थे। विवेचना पूर्ण होने के पश्चात विवेचक द्वारा आरोप पत्र माननीय न्यायालय में प्रेषित किया गया।

प्रभावी पैरवी से हुई दोषसिद्धि

पुलिस अधीक्षक बस्ती के निर्देशन में पैरवी सेल बस्ती एवं थाना परसरामपुर पुलिस द्वारा की गई सशक्त और प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप दिनांक 16 जनवरी 2026 को माननीय अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश, अनन्य न्यायालय (पॉक्सो एक्ट), बस्ती द्वारा फैसला सुनाया गया।

अदालत का फैसला

माननीय न्यायालय ने अभियुक्त इकबाल को दोष सिद्ध पाते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास एवं कुल 31,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं सहअभियुक्त प्यारी एवं सफीक को धारा 363/366/419 भादवि एवं 16/17 पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत दोषी पाते हुए 03 वर्ष के कठोर कारावास एवं 2000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

ऑपरेशन कन्विक्शन की बड़ी सफलता

यह फैसला बस्ती पॉक्सो केस सजा के तहत ऑपरेशन कन्विक्शन की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से समाज में अपराधियों के बीच कड़ा संदेश जाएगा और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए लगातार प्रभावी पैरवी की जाती रहेगी।

परमानंद मिश्रा की रिपोर्ट

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