Breaking
2 Mar 2026, Mon

बस्ती में ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन

बस्ती में ग्रामीण महिलाओं

By Aijaz Alam Khan

बस्ती। कृषि विज्ञान केंद्र पर आयोजित पांच दिवसीय रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन मंगलवार को बड़े उत्साह के साथ हुआ। यह प्रशिक्षण मौसमी फल-सब्जियों एवं गन्ना आधारित उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर केंद्रित था और इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को घरेलू स्तर पर स्वरोजगार एवं आय सृजन के व्यावहारिक मार्गदर्शन से लैस करना था। प्रशिक्षण में 25 ग्रामीण महिलाओं ने भाग लिया, जो कार्यक्रम की सक्रिय भागीदारी से यह साबित करती हैं कि ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार एवं उद्यमशीलता के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ सकती हैं।


केंद्र प्रभारी डॉ. पी. के. मिश्रा ने समापन अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक दृष्टिकोण पर आधारित था। उन्होंने प्रतिभागियों को घरेलू स्तर पर छोटे पैमाने पर लघु उद्योग स्थापित करने तथा मौसमी फल-सब्जियों एवं गन्ना आधारित उत्पादों के मूल्य संवर्धन के लिए व्यावहारिक रणनीतियों के बारे में मार्गदर्शन प्रदान किया। उनके अनुसार, प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य यह था कि महिलाएं स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के माध्यम से सामूहिक रूप से काम कर सकें और कम पूंजी में घर से ही आय सृजन कर सकें।
प्रशिक्षण कोआर्डिनेटर एवं गृह विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. अंजलि वर्मा ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रसंस्करण तकनीक, पोषण संरक्षण, गुणवत्ता मानकीकरण और लागत-लाभ विश्लेषण के बारे में विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने प्रशिक्षण को पूरी तरह हस्त-प्रयोग आधारित और सहभागी बनाया, जिससे प्रतिभागियों में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और उद्यमशील सोच का विकास हुआ। डॉ. वर्मा ने विशेष रूप से घरेलू एवं बेरोजगार महिलाओं को यह समझाया कि वे अपने खाली समय का सदुपयोग कर मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार कर सकती हैं। उन्होंने स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा मानकों, पैकेजिंग, लेबलिंग और बाजारोन्मुख उत्पाद विकास पर विशेष बल दिया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने आंवला अचार, आंवला कैंडी, कांजी, मुरब्बा, मिक्स/नवरंग अचार, चटनी, सिरका और टमाटर सॉस जैसे मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए। यह अनुभव न केवल उन्हें व्यावहारिक कौशल प्रदान करता है, बल्कि भविष्य में स्वरोजगार और आय सृजन के मजबूत माध्यम के रूप में कार्य करेगा।
कृषि विज्ञान केंद्र के पौध सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. प्रेम शंकर ने फल-सब्जियों एवं प्रसंस्कृत उत्पादों में कीट और रोग नियंत्रण, स्वच्छता मानकों और सुरक्षित भंडारण प्रबंधन पर उपयोगी जानकारी साझा की। वहीं, डॉ. वी. बी. सिंह ने मौसमी फल एवं सब्जियों की उन्नत प्रजातियों, गुणवत्तायुक्त कच्चे माल के चयन और उच्च उत्पादकता के वैज्ञानिक उपायों के बारे में प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया।
कृषि प्रसार वैज्ञानिक आर. वी. सिंह ने मूल्य संवर्धन आधारित उद्यमिता विकास, स्वयं सहायता समूहों की भूमिका, विपणन संभावनाओं और सरकारी योजनाओं के माध्यम से स्वरोजगार के अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने महिलाओं को यह समझाया कि समूह आधारित कार्यशैली और बाजारोन्मुख उत्पाद तैयार करने की क्षमता उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना सकती है।
शस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. हरिओम मिश्रा ने खाद्य प्रसंस्करण में प्रयुक्त लघु यंत्रों, उपकरणों, ऊर्जा-दक्ष तकनीकों और सुरक्षित एवं किफायती प्रसंस्करण विधियों पर व्यावहारिक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उनका उद्देश्य प्रतिभागियों को यह समझाना था कि घर में कम संसाधनों का उपयोग कर भी उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार एवं उद्यमशीलता के नए आयाम खोले हैं। प्रतिभागियों ने न केवल तकनीकी कौशल सीखा, बल्कि व्यवसायिक सोच, आत्मविश्वास और समूह आधारित कार्यशैली में भी सुधार किया। यह पहल विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए प्रेरक साबित होगी, जो कम पूंजी और सीमित संसाधनों के बावजूद घर से ही आय सृजन करना चाहती हैं।
केंद्र द्वारा आयोजित इस रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम से यह स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण महिला समुदाय में उद्यमशीलता के लिए व्यापक क्षमता मौजूद है। यदि उन्हें सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और साधन उपलब्ध कराए जाएं, तो वे न केवल स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं, बल्कि पूरे परिवार और समुदाय के लिए भी स्थायी आय के अवसर पैदा कर सकती हैं।
इस प्रकार, कृषि विज्ञान केंद्र का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आय सृजन की दिशा में एक मजबूत नींव प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी, सीखने की उत्सुकता और कार्यक्रम में शामिल वैज्ञानिकों का व्यावहारिक मार्गदर्शन इसे सफल और प्रभावशाली बना गया।
मुख्य बिंदु:
प्रशिक्षण में 25 महिलाओं ने भाग लिया और उन्होंने विभिन्न मौसमी फल-सब्जियों एवं गन्ना आधारित मूल्य संवर्धित उत्पाद बनाए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में हस्त-प्रयोग आधारित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया गया, जिससे प्रतिभागियों में आत्मनिर्भरता और उद्यमशीलता विकसित हुई।
महिलाओं को स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) और कम पूंजी में घरेलू स्तर पर आय सृजन की संभावनाओं के बारे में मार्गदर्शन दिया गया।

रिज़वान खान की रिपोर्ट
AKP News 786