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2 Mar 2026, Mon

सरकारी ट्रांसफार्मर पर निजी ताला! संविदा कर्मी की मनमानी से उपभोक्ता परेशान”

संविदा कर्मी की मनमानी से आक्रोश, 10 केवीए ट्रांसफार्मर से केबल खींचने पर रोक
निजी ट्रांसफार्मर का हवाला देकर गरीब उपभोक्ता को किया जा रहा परेशान
महुली/संत कबीर नगर।


विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मुखलिशपुर विद्युत उपकेंद्र अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में संविदा कर्मियों की मनमानी और अधिकारियों की उदासीनता से उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। ताजा मामला ग्राम पंचायत झिंगुरापार के पुरवा रौजा का है, जहां 10 केवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर को “निजी” बताकर एक गरीब उपभोक्ता को कनेक्शन देने से रोके जाने का आरोप सामने आया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बिजली आपूर्ति पहले से ही बदहाल है। आए दिन फॉल्ट, लो-वोल्टेज और अनियमित सप्लाई से उपभोक्ता परेशान हैं। शिकायतों के बावजूद विभागीय अधिकारी समस्याओं के समाधान में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। पीड़ित उपभोक्ताओं ने कई बार उच्चाधिकारियों, जिला प्रशासन और यहां तक कि मुख्यमंत्री कार्यालय तक फरियाद भेजी, लेकिन वर्षों बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
इसी क्रम में मुखलिशपुर विद्युत उपकेंद्र अंतर्गत ग्राम पंचायत झिंगुरापार के पुरवा रौजा स्थित मदरसा मिस्बाहुल उलूम रौजा के बाहर लगे 10 केवीए ट्रांसफार्मर को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि उक्त ट्रांसफार्मर को संविदा कर्मी गोविंद उर्फ नागराज तथा मदरसा के प्रधानाचार्य द्वारा निजी ट्रांसफार्मर बताकर उस पर मदरसे का मालिकाना हक जता दिया गया। जबकि यह ट्रांसफार्मर सार्वजनिक उपयोग के लिए लगाया गया था।
बताया जाता है कि मदरसे से लगभग 25 से 30 मीटर की दूरी पर रहने वाले एक विद्युत उपभोक्ता ने जब अपने घर का कनेक्शन उक्त ट्रांसफार्मर से जोड़ने का प्रयास किया, तो संविदा कर्मी ने इसे मदरसे के लिए “रिजर्व” बताते हुए कनेक्शन देने से साफ इनकार कर दिया। मजबूरन उपभोक्ता को 200 से 250 मीटर अतिरिक्त केबल डालकर गांव के दूसरे पोल से बिजली खींचनी पड़ी, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
पीड़ित का आरोप है कि संविदा कर्मी ने यह कहते हुए कनेक्शन देने से मना किया कि ट्रांसफार्मर मदरसे का है और इसके जलने पर मदरसा प्रबंधन पैसे खर्च करता है। यही नहीं, बातचीत के दौरान संविदा कर्मी द्वारा ट्रांसफार्मर जलने की स्थिति में धन उगाही की बात भी स्वीकार किए जाने का आरोप लगाया गया है। यह बयान विभागीय नियमों और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।
मामले की शिकायत अवर अभियंता सत्य प्रकाश सिंह से करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके सीयूजी नंबर पर संपर्क नहीं हो सका। जब दूसरे मोबाइल नंबर पर बात हुई तो उन्होंने समस्या पर ध्यान देने के बजाय अनावश्यक सवाल पूछते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इससे उपभोक्ता की परेशानी और बढ़ गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी ट्रांसफार्मर को निजी बताकर आम जनता को कनेक्शन से वंचित करना गंभीर अनियमितता है। इससे न केवल उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण हो रहा है, बल्कि विभाग की छवि भी धूमिल हो रही है। समाजसेवी सद्दाम खान और अकरम खान ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर बताते हुए अधिशासी अभियंता का ध्यान आकृष्ट कराया है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित संविदा कर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और पीड़ित उपभोक्ता का कनेक्शन 10 केवीए ट्रांसफार्मर से तत्काल जोड़ा जाए।
फिलहाल इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। अब देखना यह है कि विभागीय अधिकारी इस गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनाते हैं और पीड़ित उपभोक्ता को कब तक न्याय मिल पाता है।

रिज़वान खान की रिपोर्ट
AKP News 786