Breaking
2 Mar 2026, Mon

MGNREGA पर संकट: 5 जनवरी से कांग्रेस का देशव्यापी आंदोलन, सरकार पर बड़ा दबाव

By Aijaz Alam Khan

MGNREGA को खत्म करने के खिलाफ कांग्रेस का देशव्यापी अभियान

नई दिल्ली: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी ने ऐलान किया है कि वह 5 जनवरी से MGNREGA को खत्म करने के कथित फैसले के खिलाफ देशव्यापी अभियान शुरू करेगी। कांग्रेस का कहना है कि केंद्र सरकार जानबूझकर इस योजना को कमजोर कर रही है, जिससे करोड़ों गरीब और ग्रामीण परिवारों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, MGNREGA सिर्फ एक योजना नहीं बल्कि ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ है। ऐसे समय में जब महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है, सरकार द्वारा इस योजना को नजरअंदाज करना गरीब विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।

MGNREGA क्यों है गरीबों के लिए जीवनरेखा?

MGNREGA देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है। इसके तहत हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाती है। यह योजना खासकर भूमिहीन मजदूरों, महिलाओं, अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों के लिए सहारा बनी हुई है।

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतें इसी योजना से पूरी होती हैं। मजदूरी से बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घर का खर्च चलता है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने MGNREGA का बजट लगातार घटाया है, जिससे काम के दिन कम हो रहे हैं और मजदूरी भुगतान में देरी बढ़ रही है।

कांग्रेस के आरोप: जानबूझकर कमजोर की जा रही योजना

कांग्रेस का कहना है कि केंद्र सरकार MGNREGA को सीधे खत्म करने के बजाय उसे धीरे-धीरे निष्क्रिय बना रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि:

  • MGNREGA के बजट में भारी कटौती की गई है
  • मजदूरों को महीनों तक भुगतान नहीं मिल रहा
  • आधार और तकनीकी नियमों के कारण जॉब कार्ड रद्द किए जा रहे हैं
  • ग्रामीण इलाकों में काम के अवसर सीमित कर दिए गए हैं

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि ये सभी कदम इस योजना को खत्म करने की दिशा में उठाए गए हैं, जिसका सीधा असर गरीबों की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है।

5 जनवरी से कैसा होगा देशव्यापी आंदोलन?

कांग्रेस द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, यह आंदोलन पूरी तरह जमीनी स्तर पर किया जाएगा। इसमें:

  • जिला और ब्लॉक स्तर पर धरना-प्रदर्शन
  • गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान
  • राज्य राजधानियों में रैलियां
  • जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपना
  • सोशल मीडिया पर डिजिटल कैंपेन

शामिल होंगे। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार MGNREGA को लेकर स्पष्ट और सकारात्मक रुख नहीं अपनाती।

ग्रामीण भारत में बढ़ती चिंता

ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल रही है। कई जगहों पर काम की मांग के बावजूद रोजगार नहीं दिया जा रहा। इससे लोगों को शहरों की ओर पलायन करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

ग्रामीण मजदूरों का कहना है कि अगर MGNREGA कमजोर हुआ तो उनके सामने भुखमरी और बेरोजगारी का संकट खड़ा हो जाएगा। ऐसे में कांग्रेस का आंदोलन ग्रामीण भारत की आवाज बनता नजर आ रहा है।

राजनीतिक असर और आगे की राह

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि MGNREGA हमेशा से एक बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है। ग्रामीण वोट बैंक पर इसका सीधा असर पड़ता है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे आने वाले समय में सियासी तापमान और बढ़ सकता है।

हालांकि, सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी तक इस आंदोलन को लेकर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन माना जा रहा है कि अगर आंदोलन ने व्यापक रूप लिया, तो सरकार पर दबाव जरूर बढ़ेगा।

निष्कर्ष

MGNREGA पर कांग्रेस का आंदोलन केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के अस्तित्व से जुड़ा सवाल बन चुका है। 5 जनवरी से शुरू होने वाला यह देशव्यापी अभियान आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर सकता है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस दबाव का क्या जवाब देती है और MGNREGA के भविष्य को लेकर क्या कदम उठाती है।

👉 आपकी राय क्या है?
क्या MGNREGA को और मजबूत किया जाना चाहिए? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में दें और इस खबर को शेयर करें।

AKP News 786