जनपद बस्ती में इंसानियत को झकझोर देने वाली एक घटना में थाना परसरामपुर पुलिस ने तत्परता और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तीन नाबालिग बच्चों की जान बचाकर एक अमानवीय कृत्य को समय रहते विफल कर दिया। यह मामला न सिर्फ पारिवारिक रिश्तों को कलंकित करता है, बल्कि समाज के सामने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करता है।
कार्यवाही के संंबंध में क्षेत्राधिकारी हरैया द्वारा दी गया बाइट
कार्यवाही के संंबंध में क्षेत्राधिकारी हरैया द्वारा दी गया बाइट
घटना 10 दिसंबर 2025 की शाम की है। समय करीब 18:37 बजे पुलिस रेस्पॉन्स वाहन (पीआरबी) को सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम नंदनगर, थाना परसरामपुर क्षेत्र में एक व्यक्ति अपने ही नाबालिग बच्चों को घर के भीतर गड्ढा खोदकर जिंदा दफन करने का प्रयास कर रहा है। सूचना मिलते ही पीआरवी ने बिना समय गंवाए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया और मात्र छह मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीनों बच्चों—जिनकी उम्र क्रमशः 11 वर्ष, 9 वर्ष और 6 वर्ष बताई गई—को सुरक्षित बाहर निकाला। मासूमों की हालत भयभीत थी, लेकिन समय रहते पुलिस की मौजूदगी ने एक बड़ा अनर्थ होने से बचा लिया। बच्चों को सुरक्षित कब्जे में लेकर उन्हें हर संभव संरक्षण प्रदान किया गया।
सूचना की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष परसरामपुर भानू प्रताप सिंह अपनी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान सामने आया कि बच्चों का पिता मोहम्मद इरफान पुत्र शुबराती, उम्र लगभग 32 वर्ष, निवासी ग्राम नंदनगर, इस घृणित कृत्य का प्रयास कर रहा था। पुलिस ने अभियुक्त को मौके से ही हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया।
थाना परसरामपुर पर प्राप्त तहरीर के आधार पर अभियुक्त के विरुद्ध मु0अ0सं0 361/2025 अंतर्गत धारा 109(1) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) एवं धारा 75 किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया। गिरफ्तारी के बाद अभियुक्त को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे 14 दिवस की न्यायिक अभिरक्षा में भेजते हुए जिला कारागार प्रेषित किया गया।
पुलिस अधीक्षक बस्ती के निर्देशन में मिशन शक्ति अभियान फेज–5 के तहत महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विवेचना को तेज गति से आगे बढ़ाया गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विवेचक द्वारा सभी साक्ष्य, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य तथ्यों को संकलित कर विवेचना को मात्र एक सप्ताह के भीतर पूर्ण किया गया।
नतीजतन, दिनांक 17 दिसंबर 2025 को अभियुक्त मोहम्मद इरफान के विरुद्ध धारा 109(1) बीएनएस एवं धारा 75 किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अंतर्गत आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित कर दिया गया। यह त्वरित कार्रवाई बस्ती पुलिस की कार्यकुशलता और कानून के प्रति प्रतिबद्धता का स्पष्ट उदाहरण है।
यह घटना समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि बच्चों के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा, उपेक्षा या अमानवीय व्यवहार को कानून बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा। वहीं, मिशन शक्ति जैसे अभियानों की प्रासंगिकता भी इस मामले से उजागर होती है, जिनका उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है।
बस्ती पुलिस की इस कार्रवाई ने न केवल तीन मासूम जिंदगियों को बचाया, बल्कि यह भी साबित किया कि समय पर मिली सूचना और पुलिस की तत्परता से बड़ी से बड़ी घटना को रोका जा सकता है। यह मामला समाज से यह अपेक्षा भी करता है कि ऐसे मामलों में लोग चुप न रहें, बल्कि तुरंत पुलिस को सूचना देकर निर्दोषों की रक्षा में सहभागी बनें।
परमानन्द मिश्रा की रिपोर्ट
