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4 Jun 2026, Thu

बस्ती में बिना ऑपरेशन बच्चे के पेट से निकाला 20 रुपये का सिक्का

बस्ती मासूम बच्चे का इलाज

By Editor Aijaz Alam Khan

बस्ती में बिना ऑपरेशन बच्चे के पेट से निकाला गया 20 रुपये का सिक्का, डॉक्टर की हर तरफ हो रही सराहना

बस्ती मासूम बच्चे का इलाज इन दिनों पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक 5 वर्षीय बच्चे के पेट में फंसा 20 रुपये का सिक्का बिना किसी ऑपरेशन के सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया। इस सफल उपचार के बाद जहां परिवार ने राहत की सांस ली, वहीं अस्पताल परिसर में मौजूद लोग डॉक्टर की सराहना करते नहीं थके।

यह मामला बस्ती जनपद के बनकटी विकासखंड अंतर्गत ददुआखोर बघाड़ी गांव का है, जहां एक मासूम बच्चा खेलते समय गलती से 20 रुपये का सिक्का निगल गया था। सिक्का बच्चे के पेट में फंस गया, जिसके बाद परिवार की चिंता लगातार बढ़ती चली गई।

करीब एक सप्ताह तक परेशान रहने और कई जगह इलाज कराने के बाद आखिरकार परिवार को राहत मिली। टीएन मेमोरियल हॉस्पिटल, बस्ती में डॉक्टरों की टीम ने आधुनिक तकनीक और अनुभव के सहारे बिना किसी चीड़-फाड़ के सिक्का बाहर निकाल दिया।

कैसे हुई पूरी घटना?

जानकारी के अनुसार ददुआखोर बघाड़ी निवासी प्रेमचंद का 5 वर्षीय पुत्र आयुष घर में खेल रहा था। खेल-खेल में उसने गलती से 20 रुपये का सिक्का निगल लिया। शुरुआत में परिजनों को घटना की जानकारी नहीं थी, लेकिन कुछ समय बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी।

बच्चे को लगातार बेचैनी, उल्टी और पेट दर्द की शिकायत होने लगी। जब परिजनों ने डॉक्टर से जांच कराई तो पता चला कि सिक्का बच्चे के पेट में फंस गया है।

बस्ती मासूम बच्चे का इलाज कराने के लिए परिवार कई अस्पतालों और डॉक्टरों के पास गया, लेकिन उन्हें संतोषजनक इलाज नहीं मिल सका। परिवार लगभग एक सप्ताह तक बच्चे को लेकर परेशान रहा।

टीएन मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंचने पर मिली राहत

लगातार परेशान रहने के बाद परिजन 24 मई 2026 को टीएन मेमोरियल हॉस्पिटल, बस्ती पहुंचे। यहां डीएम गैस्ट्रो विशेषज्ञ डॉ. गया प्रसाद शुक्ला ने बच्चे की स्थिति को गंभीरता से समझा और तुरंत इलाज शुरू किया।

डॉ. शुक्ला ने आधुनिक तकनीक और अपने वर्षों के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए बिना किसी ऑपरेशन के बच्चे के पेट में फंसा सिक्का सुरक्षित बाहर निकाल दिया।

यह पूरा उपचार बेहद सावधानी और कुशलता के साथ किया गया। सबसे बड़ी बात यह रही कि बच्चे को किसी तरह की बड़ी सर्जरी या चीड़-फाड़ की जरूरत नहीं पड़ी।

बस्ती मासूम बच्चे का इलाज बना चर्चा का विषय

जैसे ही उपचार सफल हुआ, बच्चे के परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने भी राहत की सांस ली। कई लोग भावुक हो गए और डॉक्टर की तारीफ करते नजर आए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के समय में जहां छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी बड़े ऑपरेशन की बात सामने आती है, वहीं बिना ऑपरेशन इतना सफल इलाज होना अपने आप में बड़ी बात है।

बस्ती मासूम बच्चे का इलाज अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल Media पर भी लोग डॉक्टर की सराहना कर रहे हैं।

डॉ. गया प्रसाद शुक्ला की हो रही सराहना

इलाज करने वाले डीएम गैस्ट्रो विशेषज्ञ डॉ. गया प्रसाद शुक्ला की हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है। लोगों का कहना है कि उनकी संवेदनशीलता, अनुभव और तत्परता ने एक मासूम की जिंदगी बचा ली।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे डॉक्टरों की वजह से ही लोगों का स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा कायम रहता है।

अस्पताल में मौजूद कई लोगों ने कहा कि डॉक्टर ने न सिर्फ इलाज किया बल्कि परिवार को मानसिक रूप से भी हिम्मत दी।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर जरूरी सावधानी

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों को खेलते समय हमेशा निगरानी में रखना चाहिए। सिक्के, बैटरी, छोटे खिलौने और अन्य छोटी वस्तुएं बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं।

अगर बच्चा गलती से कोई वस्तु निगल ले तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और घरेलू उपायों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

बस्ती मासूम बच्चे का इलाज का यह मामला अभिभावकों के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ा लोगों का भरोसा

इस सफल उपचार के बाद लोगों का भरोसा स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं पर और मजबूत हुआ है। लोगों का कहना है कि अब बड़े शहरों में जाने की जरूरत कम होती जा रही है क्योंकि जिले में भी विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं।

टीएन मेमोरियल हॉस्पिटल की इस उपलब्धि की क्षेत्र में जमकर चर्चा हो रही है। कई लोगों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की टीम को धन्यवाद दिया।

परिवार ने भी डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि उनके बच्चे को नई जिंदगी मिली है।

बस्ती मासूम बच्चे का इलाज सिर्फ एक मेडिकल सफलता नहीं बल्कि मानवता और चिकित्सकीय दक्षता की मिसाल बन गया है। समय रहते सही इलाज मिलने से एक मासूम की जिंदगी सुरक्षित हो सकी और परिवार को बड़ी राहत मिली।

डॉ. गया प्रसाद शुक्ला और उनकी टीम के इस सराहनीय कार्य की पूरे क्षेत्र में प्रशंसा हो रही है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि संवेदनशीलता और अनुभव के साथ किया गया इलाज लोगों के जीवन में नई उम्मीद ला सकता है।

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रिजवान केहां की रिपोर्ट

AKP News 786