बस्ती शहर की चरमराई विद्युत व्यवस्था
By Editor Aijaz Alam Khan

बस्ती में बिजली संकट से हाहाकार: 10 मिनट आती है और 1 घंटे के लिए गायब हो जाती है लाइट, जानें आखिर कौन है इस बदहाली का जिम्मेदार।
बस्ती शहर की चरमराई विद्युत व्यवस्था: 10 मिनट बिजली और 1 घंटे की अघोषित कटौती से त्रस्त हुई जनता, जिम्मेदार मौन
उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद से एक बेहद परेशान करने वाली जमीनी हकीकत सामने आ रही है। भीषण गर्मी और उमस भरे इस मौसम में बस्ती शहर की चरमराई विद्युत व्यवस्था ने स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। शहर के व्यस्ततम इलाकों से लेकर रिहायशी कॉलोनियों तक, हर जगह बिजली की आंख-मिचौली का खेल लगातार जारी है। स्थिति यह हो चुकी है कि शहर में बिजली आने और जाने का कोई निश्चित समय तय नहीं रह गया है। अघोषित कटौती और बार-बार ट्रिपिंग के कारण आम जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है। स्थानीय निवासी इस गंभीर समस्या को लेकर बेहद आक्रोशित हैं और प्रशासन के खिलाफ उनका गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
इस संकट का सबसे बड़ा असर स्थानीय व्यापार, बच्चों की पढ़ाई और बीमार बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। लगातार हो रही इस कटौती के कारण पानी की किल्लत भी शुरू हो गई है, जिससे दोहरी मार जनता पर पड़ रही है। इस बदहाली के पीछे केवल मौसम का मिजाज नहीं, बल्कि बिजली विभाग की आंतरिक कमजोरियां, कर्मचारियों का टोटा और बुनियादी संसाधनों का घोर अभाव भी मुख्य कारण बनकर उभरा है। स्थानीय स्तर पर इस अव्यवस्था को लेकर कोई भी ठोस कदम न उठाए जाने से जनता खुद को असहाय महसूस कर रही है।
गांधी नगर बाजार सहित पूरे शहर में त्राहि-त्राहि, 10 मिनट बिजली और 1 घंटे गायब
बस्ती जनपद के मुख्य व्यावसायिक केंद्र गांधी नगर बाजार सहित पूरे बस्ती शहर में इन दिनों बिजली कटौती से आम जनता बेहद त्रस्त है। बिजली आपूर्ति की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि अगर बिजली आती भी है, तो वह मात्र 10 मिनट के लिए टिकती है और फिर अगले 1 घंटे के लिए गायब हो जाती है। इसके बाद यदि दोबारा 20 मिनट के लिए बिजली बहाल होती है, तो अगली कटौती सीधे डेढ़ घंटे के लिए कर दी जाती है। इस प्रकार रुक-रुक कर आ रही बिजली और बार-बार हो रहे फॉल्ट के कारण लोगों का पूरा दिन और रात का चैन छीन चुका है।
“बिजली विभाग की लापरवाही सीमा पार कर चुकी है। रात-रात भर बिजली न रहने से बच्चे सो नहीं पा रहे हैं, और दिन में व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। कोई भी हमारी सुनने वाला नहीं है।” – स्थानीय व्यापारी, गांधी नगर बाजार
इस बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और व्यापारियों का सीधा आरोप है कि कोई भी जनप्रतिनिधि या आला अधिकारी इस समस्या को लेकर रत्ती भर भी गंभीरता नहीं दिखा रहा है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब जनता की इस बुनियादी समस्या पर मौन साधे हुए हैं। त्रस्त नागरिक अब सीधे तौर पर बिजली विभाग और प्रशासन से यह तीखा सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इस अघोषित और दमघोंटू बिजली कटौती से उन्हें कब तक निजात मिलेगी और इसका असली जिम्मेदार कौन है।
लाइनमैन की घटती संख्या से बस्ती शहर की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह धराशाई
बिजली विभाग की इस बदहाली की परतें जब खोली गईं, तो अंदर की कहानी बेहद चौंकाने वाली निकली। खुद बिजली विभाग के कर्मचारियों और सूत्रों का कहना है कि बस्ती शहर की चरमराई विद्युत व्यवस्था के पीछे सबसे बड़ी वजह ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले लाइनमैन कर्मचारियों की संख्या में लगातार हो रही भारी कमी है। विभाग में नए कर्मचारियों की भर्ती न होने से मौजूदा स्टाफ पर काम का बोझ अत्यधिक बढ़ गया है।
कर्मचारियों के अनुसार, जिस तकनीकी और मरम्मत कार्य को पहले कम से कम 10 कर्मचारी मिलकर पूरा करते थे, आज वही अत्यधिक जोखिम भरा काम केवल 3 कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया गया है। कर्मचारियों की इस भारी कमी के कारण पूरे शहर की विद्युत लाइनों का रखरखाव और फॉल्ट ठीक करने की प्रक्रिया पूरी तरह चरमरा गई है। इसके अतिरिक्त, आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखे गए इन लाइनमैन कर्मचारियों का शोषण भी चरम पर है, जिससे उनके कार्य प्रदर्शन और मनोबल पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का दर्द: कम वेतन और अत्यधिक काम
- वेतन की विसंगति: जान जोखिम में डालकर काम करने वाले आउटसोर्सिंग लाइनमैनों को वेतन के रूप में महज 10,000 से 12,000 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं।
- काम के घंटों का शोषण: इन कर्मचारियों से निर्धारित 8 घंटे की जगह 12 से लेकर 16-16 घंटे तक लगातार काम लिया जा रहा है।
- मानसिक और शारीरिक तनाव: अत्यधिक कार्यभार और नींद पूरी न होने के कारण फील्ड पर काम करते समय हादसों का खतरा भी हमेशा बना रहता है।
कर्मचारियों का साफ कहना है कि कर्मचारियों की इस घटती संख्या और भारी काम के दबाव के कारण ही विद्युत व्यवस्था को सुचारू रूप से चला पाना अब पूरी तरह असंभव होता जा रहा है। जब तक नए लाइनमैनों की स्थाई भर्ती नहीं होगी, तब तक व्यवस्था में सुधार की उम्मीद करना बेमानी है।
आधुनिक संसाधनों का घोर अभाव: लकड़ी की सीढ़ी के भरोसे बिजली विभाग
एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया और अत्याधुनिक तकनीकों की बातें करती है, वहीं दूसरी तरफ बस्ती जिले का विद्युत विभाग आज भी बेहद आदिम और पुराने ढर्रे पर चल रहा है। विभागीय कर्मचारियों ने अत्यंत निराशाजनक खुलासा करते हुए बताया कि विभाग आज के आधुनिक दौर में भी अपने लाइनमैनों को एक बुनियादी उपकरण जैसे ‘हाइड्रोलिक सीढ़ी’ तक उपलब्ध नहीं करा पाया है। आज भी लाइनमैनों को ऊंचे खंभों और जर्जर तारों को ठीक करने के लिए भारी-भरकम पारंपरिक लकड़ी की सीढ़ी का सहारा लेना पड़ता है।
इस अभाव के कारण मैदानी स्तर पर काम करना कितना कठिन हो जाता है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब शहर के किसी एक कोने में फॉल्ट ठीक होता है, तो दूसरे कोने में हुए फॉल्ट तक पहुँचने के लिए कर्मचारियों को वही भारी लकड़ी की सीढ़ी कंधे पर लादकर पैदल ही सफर तय करना पड़ता है।
इस पूरी प्रक्रिया में औसतन 1 घंटे से अधिक का समय केवल सीढ़ी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ढोने में ही बर्बाद हो जाता है। यही मुख्य कारण है कि छोटा सा फॉल्ट होने पर भी उपभोक्ताओं को घंटों अंधेरे में बैठकर बिजली आने का इंतजार करना पड़ता है।
इस पूरे मामले पर जब स्थानीय विभागीय अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने नई भर्तियों और आवश्यक संसाधनों की मांग को लेकर कई बार शासन और मुख्यालय को लिखित डिमांड भेजी है। परंतु, शासन स्तर से नई नियुक्तियों को मंजूरी न मिलने और बजट की कमी के कारण मुख्यालय से कोई सहायता या नए उपकरण प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं। इस प्रशासनिक उदासीनता का सीधा खामियाजा बस्ती की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
गर्मी और उमस के बीच जनजीवन अस्त-व्यस्त, स्थानीय स्तर पर आक्रोश
जुलाई महीने की इस रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और उमस भरे मौसम में बिजली की इस घोर अव्यवस्था ने समाज के हर वर्ग को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है। घर के अंदर हवा न होने से छोटे बच्चे बिलख रहे हैं, वहीं गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों और सांस के रोगियों की हालत नाजुक होती जा रही है। स्थानीय अस्पतालों में भी बिजली बैकअप फेल होने की खबरें आ रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
व्यापारिक दृष्टिकोण से देखें तो गांधी नगर जैसे बड़े बाजारों के दुकानदारों का धंधा पूरी तरह चौपट होने की कगार पर पहुँच गया है। बिना बिजली के दुकानों पर ग्राहक नहीं आ रहे हैं और जेनरेटर चलाने के अत्यधिक खर्च के कारण दुकानदारों की जेब खाली हो रही है। इस गंभीर संकट को देखते हुए अब पूरे बस्ती जनपद में नागरिक एकजुट होने लगे हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शासन स्तर पर त्वरित कार्रवाई करते हुए नए लाइनमैनों की भर्ती नहीं की गई और बस्ती शहर को आधुनिक सुरक्षा उपकरण व पर्याप्त संसाधन नहीं दिए गए, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने के लिए विवश होंगे।
बस्ती जनपद में बिजली की यह बदहाली केवल एक तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक उपेक्षा और लचर नीति का एक जीता-जागता प्रमाण है। जब तक बिजली विभाग जमीनी स्तर पर काम करने वाले लाइनमैनों की गरिमा, उनके वेतन और उनकी सुरक्षा को लेकर संवेदनशील नहीं होगा, तब तक किसी बड़े सुधार की कल्पना करना व्यर्थ है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि उत्तर प्रदेश शासन और ऊर्जा मंत्रालय तत्काल इस मामले का संज्ञान लें, बस्ती जनपद के लिए विशेष बजट आवंटित कर आधुनिक उपकरण मुहैया कराएं और रिक्त पड़े पदों पर पारदर्शी तरीके से नई भर्तियां शुरू करें। ऐसा करके ही बस्ती शहर की इस अंधकारमय स्थिति को दूर किया जा सकता है और आम नागरिकों को उनका बुनियादी अधिकार प्रदान किया जा सकता है।
अपनी राय अवश्य व्यक्त करें! क्या आपके क्षेत्र में भी बिजली कटौती की यही स्थिति है? इस गंभीर विद्युत संकट और बिजली विभाग की इस लचर कार्यप्रणाली को लेकर आप क्या सोचते हैं? अपने विचार और शिकायतें नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अवश्य दर्ज करें। यदि आप चाहते हैं कि यह आवाज शासन के गलियारों तक पहुंचे, तो इस खबर को फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर पर अधिक से अधिक शेयर करें। हमारी वेबसाइट को सब्सक्राइब करें ताकि जनपद बस्ती और उत्तर प्रदेश की हर छोटी-बड़ी जमीनी समस्या की निष्पक्ष रिपोर्ट आप तक सबसे पहले पहुंचती रहे।
रिजवान खान की रिपोर्ट