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2 Sep 2026, Wed

GST की विसंगतियों को लेकर व्यापारियों ने सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी

GST Discrepancies Merchant Memorandum Basti

By Editor Aijaz Alam Khan

जीएसटी विसंगतियों और उत्पीड़न से नाराज बस्ती के व्यापारियों ने वित्त मंत्री को भेजा ज्ञापन, मांगें पूरी न होने पर दी आंदोलन की कड़ी चेतावनी। ​

GST Discrepancies Merchant Memorandum Basti: जीएसटी की विसंगतियों को लेकर व्यापारियों ने सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की दी चेतावनी

GST Discrepancies Merchant Memorandum Basti का मामला उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में व्यापारिक हलचलों और कर प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की बस्ती इकाई ने जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) की वर्तमान व्यवस्था में व्याप्त तकनीकी विसंगतियों, जटिलताओं और विभागीय अधिकारियों की कथित मनमानी के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाई है। व्यापारियों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों का शीघ्र निस्तारण नहीं किया गया, तो वे बड़े पैमाने पर जन-आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ​

व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष बस्ती मंडल हरि मूर्ति सिंह मनोज के नेतृत्व में राज्य कर आयुक्त उपेंद्र यादव के माध्यम से भारत सरकार की वित्त मंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में कर प्रणाली के कारण आ रही व्यावहारिक समस्याओं, छोटे और मध्यम व्यापारियों पर पड़ रहे अनावश्यक वित्तीय दबावों और विभागीय उत्पीड़न को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। GST Discrepancies Merchant Memorandum Basti के माध्यम से व्यापारियों ने सरकार का ध्यान उन बुनियादी कमियों की ओर आकर्षित किया है जो व्यापार-अनुकूल वातावरण को प्रभावित कर रही हैं। ​

तकनीकी भूलों पर जुर्माना और विभागीय उत्पीड़न का मुद्दा

ज्ञापन में मुख्य रूप से इस बात पर चिंता व्यक्त की गई है कि जीएसटी विभाग के कुछ अधिकारी केवल तकनीकी त्रुटियों और मानवीय भूलों को आधार बनाकर व्यापारियों पर अनुचित कार्रवाई कर रहे हैं। कई मामलों में पर्याप्त कर जमा होने के बावजूद केवल लिपिकीय या कागजी त्रुटियों के कारण भारी-भरकम जुर्माना आयतित कर दिया जाता है। व्यापारियों का तर्क है कि इससे न केवल ईमानदार करदाताओं का उत्पीड़न हो रहा है, बल्कि भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी बढ़ रही है। ​

प्रदेश उपाध्यक्ष हरि मूर्ति सिंह मनोज ने अपने वक्तव्य में कहा कि सचल दस्तों (Mobile Squads) का मूल उद्देश्य कर चोरी रोकना होना चाहिए, न कि पूरी निष्ठा के साथ समय पर कर जमा करने वाले व्यापारियों को छोटी-छोटी कमियों के आधार पर बेवजह परेशान करना। उन्होंने माँग की कि सचल दस्तों द्वारा की जाने वाली इस प्रकार की उत्पीड़नकारी कार्रवाइयों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए ताकि व्यापारी निर्भीक होकर अपना कारोबार संचालित कर सकें। ​

छोटे व्यापारियों पर दबाव और एसआईबी जांच पर सवाल

व्यापार मंडल के अन्य प्रमुख पदाधिकारियों ने भी जीएसटी व्यवस्था की विसंगतियों पर कड़ा प्रहार किया। जिला संगठन महामंत्री भरत राम अग्रहरी (बबलू) ने रेखांकित किया कि जीएसटी नियमों के अनुसार 40 लाख रुपये तक के वार्षिक टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों को जीएसटी पंजीकरण से स्पष्ट छूट प्रदान की गई है। इसके बावजूद, विभागीय अधिकारी ज़मीनी स्तर पर छोटे व्यापारियों पर अनावश्यक रूप से पंजीकरण कराने का दबाव बना रहे हैं, जो कि सरकारी नियमों का उल्लंघन है। ​

वहीं, युवा जिला अध्यक्ष कुलदीप श्रीवास्तव ने एसआईबी (विशेष अनुसंधान शाखा) की जांच प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही व्यापारियों पर मनमाने ढंग से कर जमा करने का अनैतिक दबाव बनाया जाता है, जो सर्वथा अनुचित है। जांच पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, तथा अंतिम निर्णय से पहले किसी भी प्रकार की वसूली का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। ​

व्यापारियों के कल्याण हेतु प्रमुख सुझाव एवं मांगें

ज्ञापन में केवल समस्याओं का उल्लेख ही नहीं किया गया, बल्कि व्यापारिक हित में कई ठोस और सुधारात्मक सुझाव भी प्रस्तुत किए गए हैं। इन मांगों में व्यापारियों की सामाजिक सुरक्षा, कर दरों का सरलीकरण और वित्तीय राहत शामिल हैं: ​

  • व्यापारी बीमा योजना: नगर अध्यक्ष राणा महेंद्र प्रताप ने मांग उठाई कि सभी पंजीकृत जीएसटी व्यापारियों के लिए कम से कम ₹10 लाख के मुफ्त दुर्घटना बीमा का प्रावधान किया जाए।
  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता: उद्योग मंच के जिला अध्यक्ष कमलेश चौधरी ने मांग की कि डिजिटल इंडिया के तहत कर अनुपालन को सुगम बनाने हेतु पंजीकृत व्यापारियों को लैपटॉप एवं आवश्यक बिलिंग/अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएं।
  • ब्याज दर में कटौती: जिला उपाध्यक्ष महेंद्र गुप्ता ने विलंब से जीएसटी भुगतान पर लगने वाले 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज को अत्यधिक बताते हुए इसे घटाकर 6 प्रतिशत करने की मांग की।
  • जेल के प्रावधान की समाप्ति: युवा जिला महामंत्री सत्य प्रकाश दुबे ने कहा कि जीएसटी कानून में जेल की सजा के कठोर प्रावधानों को समाप्त कर केवल आर्थिक दंड का प्रावधान रखा जाना चाहिए ताकि व्यापारी आपराधिक भय से मुक्त होकर कार्य कर सकें।
  • तंबाकू दरों में विषमता: युवा जिला संगठन महामंत्री संजय सिंह ने तैयार तंबाकू और तंबाकू के पत्तों पर जीएसटी दरों में मौजूद विषमता को दूर करने की मांग की।
  • स्वतः रिफंड प्रक्रिया: महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष वंदना वर्मा ने मांग की कि अतिरिक्त आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) एवं जीएसटी रिफंड को रिटर्न दाखिल होने के बाद बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सीधे व्यापारी के बैंक खाते में भेजा जाए, और विलंब होने पर सरकार द्वारा ब्याज दिया जाए।

व्यापारिक माहौल पर प्रभाव और कानूनी सुधारों की आवश्यकता

जीएसटी लागू होने के बाद से ही इसके नियमों में कई बार संशोधन किए जा चुके हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर ई-वे बिल और आईटीसी क्लेम से जुड़ी जटिलताएँ आज भी कायम हैं। ज्ञापन में ट्रांसपोर्टरों द्वारा ई-वे बिल-2 जनरेट होने की स्थिति में उसे दोहरी बिक्री (Double Sale) मानकर की जाने वाली दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने तथा पैकिंग सामग्री पर आईटीसी का पूरा लाभ देने की बात भी कही गई है। ​

“व्यापार देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने के बजाय दंडात्मक और जटिल बनाया जाएगा, तो इससे न केवल व्यापार प्रभावित होगा बल्कि राजस्व संग्रह पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।”

बस्ती जनपद के इस व्यापक विरोध प्रदर्शन में आकाश सोनी (जिला उपाध्यक्ष), अवधेश निषाद (नगर मंत्री), संजय गुप्ता (नगर संगठन मंत्री), सत्यम सिंह (जिला महामंत्री, उद्योग मंच), प्रवीण सिंह (मंत्री, बस्ती मंडल) सहित भारी संख्या में व्यापारी और संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे। व्यापारियों की इस गोलबंदी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी जायज मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। ​ ​

बस्ती में व्यापारियों द्वारा एकजुट होकर ज्ञापन सौंपना और आंदोलन की चेतावनी देना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कर प्रणाली के सरलीकरण और जमीनी क्रियान्वयन में अभी भी कई सुधारों की आवश्यकता है। GST Discrepancies Merchant Memorandum Basti केवल एक स्थानीय विरोध नहीं है, बल्कि यह उन हज़ारों मध्यम और छोटे कारोबारियों की आवाज़ है जो जटिल कर प्रक्रियाओं और प्रशासनिक दबावों के बीच अपने व्यवसाय को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। यदि शासन और प्रशासन समय रहते इन व्यावहारिक समस्याओं का निस्तारण करते हैं, तो इससे न केवल व्यापारिक सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्य के राजस्व में भी गुणात्मक वृद्धि होगी। ​

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रिपोर्ट रिजवान खान

AKP NNews 786