नई दिल्ली। देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की योजना को बढ़ावा दिए जाने के साथ ही इथेनॉल उद्योग का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में इथेनॉल फैक्ट्री स्थापित करने के लिए कई सरकारी अनुमतियां, तकनीकी मानकों और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।
सबसे पहले फैक्ट्री के लिए ऐसी भूमि का चयन किया जाता है जो औद्योगिक उपयोग के लिए निर्धारित हो। वहां पर्याप्त पानी, बिजली तथा सड़क और रेल परिवहन की सुविधा उपलब्ध होना आवश्यक है। इसके साथ ही गन्ने का रस, शीरा, मक्का, टूटे चावल अथवा अन्य अनाज जैसे कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होती है।
इथेनॉल उत्पादन शुरू करने से पहले राज्य आबकारी विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके अलावा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय अथवा राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण से पर्यावरण संबंधी स्वीकृति प्राप्त करनी होती है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्थापना और संचालन की अनुमति भी आवश्यक होती है। साथ ही यह सुनिश्चित करना पड़ता है कि फैक्ट्री से निकलने वाला अपशिष्ट जल बिना उपचार के बाहर न छोड़ा जाए।

फैक्ट्री संचालन के लिए श्रम विभाग से कारखाना लाइसेंस, स्थानीय अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र तथा पेट्रोलियम और विस्फोटक पदार्थ सुरक्षा प्राधिकरण से इथेनॉल और शीरा भंडारण टैंकों की अनुमति लेना भी जरूरी होता है। ईंधन के रूप में उपयोग होने वाले इथेनॉल की गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक ब्यूरो का प्रमाणन भी आवश्यक होता है।
इथेनॉल उत्पादन करने वाली इकाइयों को देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों के साथ दीर्घकालिक खरीद अनुबंध के लिए पंजीकरण कराना पड़ता है, जिससे उत्पादित इथेनॉल की नियमित खरीद सुनिश्चित हो सके।
बैंक से ऋण प्राप्त करने तथा सरकारी सहायता योजनाओं का लाभ लेने के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करना आवश्यक होता है। इसमें कच्चे माल की उपलब्धता, प्रतिदिन उत्पादन क्षमता, अनुमानित लागत तथा तकनीकी व्यवस्था का पूरा विवरण दिया जाता है। आधुनिक इथेनॉल संयंत्रों में किण्वन, आसवन और निर्जलीकरण जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
इथेनॉल उद्योग से किसानों को बड़ा लाभ मिलता है। गन्ने, शीरा, मक्का और टूटे चावल की मांग बढ़ने से उनकी आय में वृद्धि होती है। पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से ईंधन अधिक स्वच्छ रूप से जलता है, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है और विदेशी मुद्रा की बचत होती है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं।
हालांकि, यदि पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं किया जाए तो फैक्ट्री से निकलने वाला दूषित अपशिष्ट जल भूजल और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा संयंत्र से निकलने वाली गैसों और दुर्गंध के कारण आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इथेनॉल फैक्ट्री स्थापित करने और उसके संचालन के दौरान सभी पर्यावरणीय, सुरक्षा और कानूनी मानकों का पालन करना आवश्यक माना गया है।