
कुरआन शरीफ को दुरुस्त करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन, मक्का मस्जिद स्योहारा में सिखाई गई सही तिलावत
बिजनौर (स्योहारा): जनपद बिजनौर के स्योहारा नगर में कुरआन शरीफ को सही तरीके से समझने और दुरुस्त पढ़ने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्योहारा स्थित मक्का मस्जिद में आयोजित हुआ, जिसमें नगर सहित आसपास के क्षेत्रों और बाहर से आए उलेमा-ए-दीन व क़ारियों ने शिरकत की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कुरआन शरीफ की सही तिलावत और उसके मक्सद को आम लोगों, खासकर नौजवानों तक पहुंचाना रहा।
कुरआन की सही तिलावत पर दिया गया विशेष जोर
कार्यक्रम के दौरान कुरआन शरीफ की तिलावत को दुरुस्त करने और तजवीद के साथ पढ़ने की अहमियत पर विस्तार से चर्चा की गई। मौजूद उलेमा-ए-दीन ने कहा कि कुरआन शरीफ केवल पढ़ने की किताब नहीं है, बल्कि उसे सही उच्चारण, सही मक़ाम और समझ के साथ पढ़ना हर मुसलमान की जिम्मेदारी है।
मुख्य अतिथि क़ारी आफताब उस्ताद देवबंद का मार्गदर्शन
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क़ारी आफताब उस्ताद देवबंद ने शिरकत की। उन्होंने कुरआन शरीफ की तिलावत को दुरुस्त करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि गलत उच्चारण से अर्थ में बदलाव हो सकता है, इसलिए हर मुसलमान को तजवीद के साथ कुरआन पढ़ना सीखना चाहिए। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से सही तिलावत का अभ्यास भी कराया, जिससे उपस्थित लोगों को काफी लाभ मिला।
शहर इमाम मौलाना कामिल कासमी ने की अध्यक्षता
कार्यक्रम की अध्यक्षता शहर इमाम मौलाना कामिल कासमी ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में कुरआनी शिक्षा को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बच्चों और युवाओं को कुरआन की सही तालीम देना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
शिक्षा को आम करना हमारा मकसद: मौलाना अरशद हक़ी
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मौलाना अरशद हक़ी ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य मकसद कुरआनी शिक्षा को आम करना है। उन्होंने कहा कि आज के नौजवान पढ़ाई तो कर रहे हैं, लेकिन अगर वे कुरआन शरीफ को सही तरीके से समझें और दुरुस्त पढ़ें, तभी शिक्षा का असली मकसद पूरा होगा। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से यह कार्यक्रम रखा गया है और भविष्य में भी इस तरह के प्रोग्राम लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे।
नौजवानों के लिए खास संदेश
मौलाना अरशद हक़ी ने विशेष रूप से नौजवानों को संबोधित करते हुए कहा कि कुरआन शरीफ इंसान को सही रास्ता दिखाता है। अगर नौजवान कुरआन की तालीम को अपनी जिंदगी में अपनाएं, तो समाज में बुराइयां खुद-ब-खुद कम हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि कुरआन को सही समझना और उस पर अमल करना ही इसकी सच्ची तालीम है।
उलेमा-ए-दीन और क़ारियों की रही बड़ी मौजूदगी
इस जागरूकता कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उलेमा-ए-दीन और क़ारी मौजूद रहे। प्रमुख रूप से मौलाना इम्तियाज़ क़ासमी (इमाम जामा मस्जिद स्योहारा), मौलाना शाहिद (इमाम शाही मस्जिद), मुफ्ती हारून, क़ारी इक़रार अहमद, क़ारी मोहम्मद दानिश, क़ारी आकिल, क़ारी अब्दुल बासित, क़ारी नौशाद, क़ारी आरिफ, क़ारी ताहिर, क़ारी मोहम्मद कासिम, क़ारी इस्माइल सहित भारी संख्या में उलेमा-ए-दीन ने शिरकत की।
तिलावत सिखाने का हुआ व्यावहारिक अभ्यास
कार्यक्रम के दौरान केवल भाषण ही नहीं, बल्कि कुरआन शरीफ की सही तिलावत का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। क़ारियों ने मखारिज, तजवीद और सही उच्चारण के बारे में विस्तार से समझाया। उपस्थित लोगों ने इसे बेहद लाभकारी बताया।
दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में सामूहिक दुआ कराई गई, जिसमें समाज में अमन, भाईचारे और कुरआनी शिक्षा के प्रचार-प्रसार की कामना की गई। उपस्थित लोगों ने इस तरह के और कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
निष्कर्ष
स्योहारा की मक्का मस्जिद में आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम कुरआन शरीफ की सही तिलावत और समझ को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय पहल साबित हुआ। इस तरह के आयोजन न केवल धार्मिक शिक्षा को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज को सही दिशा देने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
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रिजवान खान की रिपोर्ट
