🌙 रमजान के तीनों अशरों पर संक्षिप्त लेख
इस्लामी कैलेंडर का पवित्र महीना रमजान रहमत, मग़फ़िरत और निजात का महीना है। पूरे महीने को तीन हिस्सों (अशरों) में बाँटा गया है, और हर अशरे की अपनी विशेष अहमियत है।

1️⃣ पहला अशरा – रहमत (दया) का अशरा
रमजान के पहले दस दिन रहमत यानी अल्लाह की दया और कृपा के होते हैं।
इस अशरे में बंदा रोज़ा रखकर, नमाज़ पढ़कर, कुरआन की तिलावत करके और दुआ करके अल्लाह की रहमत हासिल करता है।
📖 हदीस में आता है कि रमजान का पहला हिस्सा रहमत है।
👉 इस अशरे में खास दुआ:
“रब्बिग़्फिर वर्हम व अंता ख़ैरुर्राहिमीन”
(ऐ मेरे रब! मुझे माफ़ कर और मुझ पर रहम कर, तू सबसे बड़ा रहम करने वाला है।)
2️⃣ दूसरा अशरा – मग़फ़िरत (क्षमा) का अशरा
रमजान के दूसरे दस दिन मग़फ़िरत यानी गुनाहों की माफी के हैं।
इस दौरान इंसान को अपने गुनाहों पर सच्चे दिल से तौबा करनी चाहिए और अल्लाह से माफी मांगनी चाहिए।
📖 हदीस के मुताबिक रमजान का दूसरा हिस्सा मग़फ़िरत है।
👉 इस अशरे में पढ़ी जाने वाली दुआ:
“अस्तग़फिरुल्लाह रब्बी मिन कुल्ले ज़ंबिन व अत्तूबु इलैह”
(मैं अपने रब से अपने हर गुनाह की माफी मांगता हूँ और उसी की ओर लौटता हूँ।)
3️⃣ तीसरा अशरा – निजात (जहन्नम से मुक्ति) का अशरा
रमजान के आख़िरी दस दिन निजात यानी जहन्नम की आग से आज़ादी के हैं।
इन्हीं दिनों में शबे क़द्र (लैलतुल क़द्र) भी आती है, जो हजार महीनों से बेहतर रात है।
📖 शबे क़द्र का ज़िक्र कुरआन की कुरआन शरीफ़ की सूरह अल-क़द्र में मिलता है।
👉 इस अशरे की मशहूर दुआ:
“अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफ्व फ़अफ़ु अन्नी”
(ऐ अल्लाह! तू माफ़ करने वाला है और माफी को पसंद करता है, मुझे माफ़ कर दे।)
✨ निष्कर्ष
रमजान का महीना इंसान को सुधारने, अपने गुनाहों से तौबा करने और अल्लाह के करीब होने का बेहतरीन मौका देता है।
पहला अशरा रहमत का, दूसरा मग़फ़िरत का और तीसरा निजात का संदेश देता है।
रिपोर्ट : परमानन्द मिश्रा
