खेती की जमीन पर जबरिया सरकारी निर्माण
बस्ती जिले के वाल्टरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत गनेशपुर नगर पंचायत से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां स्थानीय किसान राधेश्याम और उनके परिजनों ने खेती की जमीन पर जबरिया सरकारी निर्माण किए जाने का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी निजी कृषि भूमि पर बिना सहमति और बिना विधिक प्रक्रिया पूरी किए शौचालय और आंगनवाड़ी केंद्र का निर्माण कर दिया गया है, जिससे उन्हें भारी नुकसान और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है।

पीड़ित राधेश्याम, निवासी बड़ेबन (गनेशपुर नगर पंचायत), ने मुख्यमंत्री पोर्टल, तहसील दिवस और उपजिलाधिकारी सहित कई उच्चाधिकारियों को शिकायत पत्र देकर इस मामले में न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी जमीन से संबंधित पैमाइश धारा 24 के तहत पहले से ही लंबित है, इसके बावजूद प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत के चलते खेती की जमीन पर जबरिया सरकारी निर्माण करा दिया गया।
पहले भी की गई थी शिकायत, नहीं हुई कार्रवाई
राधेश्याम ने अपने शिकायती पत्र में उल्लेख किया है कि उन्होंने इससे पहले थाना दिवस, तहसील दिवस, नगर पंचायत अध्यक्ष, उपजिलाधिकारी और प्रमुख सचिव (राजस्व) तक को रजिस्टर्ड शिकायत पत्र भेजा था। हर स्तर पर मामले की गंभीरता बताई गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ितों का आरोप है कि शिकायतों को नजरअंदाज कर जिम्मेदार अधिकारी मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
लेखपाल की रिपोर्ट पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप लेखपाल की भूमिका को लेकर लगाए गए हैं। राधेश्याम का कहना है कि खाद गड्ढा (गाटा संख्या 3044) और खलिहान (गाटा संख्या 3045) की आड़ में उनकी गाटा संख्या 3043 पर निर्माण कराया गया। जबकि लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट में खाद गड्ढा और खलिहान की जमीन को खाली दिखाया है। पीड़ितों के अनुसार, यह रिपोर्ट तथ्यों के विपरीत है और जानबूझकर गलत आख्या लगाई गई है।
राधेश्याम ने आरोप लगाया कि उपजिलाधिकारी द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में भी लेखपाल ने मनमानी करते हुए वास्तविक स्थिति को छिपाया, जिससे खेती की जमीन पर जबरिया सरकारी निर्माण को वैध दिखाने का प्रयास किया गया।
साजिशन जमीन हड़पने का आरोप
पीड़ित परिवार का कहना है कि यह पूरा मामला साजिश के तहत उनकी जमीन हड़पने का है। राधेश्याम के अनुसार, उनकी आराजी संख्या 40-3043, 3061, 3060स और 3059 की विधिवत पैमाइश कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। साथ ही गाटा संख्या 3044 और 3045, जो क्रमशः खाद गड्ढा और खलिहान के नाम दर्ज हैं, उन पर हो रहे अवैध निर्माण को तत्काल रोका जाए या ध्वस्त कराया जाए।
उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में और भी किसानों की खेती की जमीन पर जबरिया सरकारी निर्माण के नाम पर कब्जा किया जा सकता है।
किसानों में बढ़ता आक्रोश
इस घटना के बाद क्षेत्र के अन्य किसानों में भी आक्रोश देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि सरकारी योजनाओं के नाम पर निजी कृषि भूमि पर कब्जा किया जाएगा तो उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा। खेती पहले ही महंगी और जोखिम भरी हो चुकी है, ऐसे में जमीन छिन जाना किसानों के लिए सबसे बड़ा संकट है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए कानून का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है। बिना भूमि अधिग्रहण और बिना मुआवजा दिए खेती की जमीन पर जबरिया सरकारी निर्माण किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित राधेश्याम और उनके परिजनों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जमीन की सही पैमाइश कराई जाए और दस्तावेजों की जांच हो तो सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी। उन्होंने यह भी मांग की है कि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
निष्कर्ष
बस्ती के गनेशपुर नगर पंचायत का यह मामला केवल एक परिवार की जमीन का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है। खेती की जमीन पर जबरिया सरकारी निर्माण जैसे आरोप प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। अब देखना यह होगा कि शासन और प्रशासन इस मामले में कितनी पारदर्शिता और संवेदनशीलता दिखाता है, और क्या पीड़ित किसान को समय रहते न्याय मिल पाता है या नहीं।
