नई दिल्ली। राजधानी के झंडेवाला इलाके में 29 नवंबर 2025 को नगर निगम (MCD) ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाते हुए पुराना धार्मिक परिसर — झंडे वाला मंदिर कंप्लेक्स और आसपास के कई ढांचों पर बुलडोज़र चलाया। कार्रवाई सुबह से शुरू हुई और देर शाम तक चलती रही। पूरे अभियान के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा।

स्थानीय लोगों के मुताबिक मंदिर परिसर कई दशकों से मौजूद था और धार्मिक व सांस्कृतिक केंद्र माना जाता रहा। उनका आरोप है कि बिना पर्याप्त नोटिस और बातचीत के अचानक बुलडोज़र चलाया गया, जिससे मंदिर प्रांगण के हिस्से के साथ लंगर हॉल, रहवासी कमरे और लगभग 100 से अधिक मकान ढहा दिए गए। कार्रवाई के दौरान महिलाओं और बुजुर्गों ने रोते-बिलखते विरोध जताया, लेकिन अभियान नहीं रोका गया।
इसी बीच MCD ने साफ़ कहा है कि ध्वस्त किए गए निर्माण अवैध और असुरक्षित थे। निगम का दावा है कि नोटिस पहले भेज दिया गया था और नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई। अधिकारियों के अनुसार “स्वीकृत धार्मिक संरचना” को निशाना नहीं बनाया गया, बल्कि अतिक्रमण वाले हिस्से को हटाया गया है।
सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल होने के बाद विवाद और तेज़ हो गया। कई यूज़र्स ने दावा किया कि यह सदियों पुराना मंदिर परिसर था, जिसे विकास कार्य या पार्किंग विस्तार के लिए गिराया गया। वायरल दावों ने इस कार्रवाई को धार्मिक भावना, इतिहास और प्रशासनिक पारदर्शिता के सवालों के घेरे में ला दिया।
घटना के बाद झंडेवाला इलाके में तनाव की स्थिति रही, जिसके चलते अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। फिलहाल हालात नियंत्रित हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों ने मुआवज़ा, पुनर्वास और धार्मिक परिसर की मान्यता की मांग उठाई है।

स्पष्ट है — 29 नवंबर 2025 की यह कार्रवाई केवल अवैध निर्माण हटाने की कवायद नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं और सरकारी दृष्टिकोण के टकराव के रूप में उभर चुकी है।
ब्यूरो रिपोर्ट
