Jagadguru Rambhadracharya का आह्वान: राष्ट्र संकट में हो तो संत समाज एकजुट हो
बढ़नी मिश्र आश्रम को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का संकल्प
बस्ती। महर्षि वशिष्ठ आश्रम, बढ़नी मिश्र में चल रही गुरू वशिष्ठ रामायण कथा के सातवें दिन वातावरण श्रद्धा, भक्ति और राष्ट्रभाव से ओत-प्रोत रहा। कथा के प्रमुख वक्ता Jagadguru Rambhadracharya ने रामकथा के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण एवं ओजस्वी विवेचन करते हुए कहा कि जब भी राष्ट्र पर संकट आए, संत समाज को मतभेद भुलाकर एकजुट हो जाना चाहिए।
कथा के दौरान उन्होंने महाराज दशरथ द्वारा गुरु वशिष्ठ के आदेश पर श्रीराम और लक्ष्मण को विश्वामित्र को सौंपने, गुरु वशिष्ठ-विश्वामित्र संवाद, अहिल्या उद्धार, धनुष यज्ञ और श्रीराम विवाह जैसे प्रसंगों को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे केवल कथावाचक या प्रवचनकर्ता नहीं, बल्कि आचार्य हैं, और उनका उद्देश्य समाज को धर्म व राष्ट्र के प्रति जागरूक करना है।

भावुक क्षणों में उन्होंने बढ़नी मिश्र आश्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का संकल्प भी दोहराया। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई— “सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाईं, राम देत नहीं बनइ गुसाईं” — के माध्यम से महर्षि वशिष्ठ की लोकमंगलकारी भूमिका पर प्रकाश डाला और बताया कि गुरु परंपरा ही समाज को दिशा देती है।
कार्यक्रम में पादुका पूजन दिनेश मिश्रा व मीरा मिश्रा ने किया। मुख्य यजमान चंद्र भूषण मिश्रा रहे, जबकि कथा संयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह ने आगंतुक श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर गोरक्ष प्रांत के सहसंघ प्रांत प्रचारक सुरजीत, भाजपा जिला अध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा, पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, पूर्व विधायक चंद्र प्रकाश शुक्ला, नगर पंचायत अध्यक्ष नीलम सिंह राना, ब्लॉक प्रमुख अभिषेक कुमार सहित अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधि और समाजसेवी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का रसास्वादन किया। संचालन मयंक श्रीवास्तव ने किया।
सांस्कृतिक संध्या में भक्ति की सरिता
कथा के सातवें दिन आयोजित सांस्कृतिक संध्या महोत्सव में भजन-कीर्तन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। जागृति सिंह ने “तेरी जय हो गणेश” और “मेरे झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे” जैसे भजनों से समां बांधा। शाही शुभम गुप्ता ने “मेरे वीर हनुमान” और “राम-राम जय राजा राम” प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। भजन गायक राज ने “जो राम को लाए हैं” तथा दीपक दिलदार ने “मेरे मन में बसे हैं राम” जैसे भजनों से पंडाल को भक्ति-सागर में डुबो दिया।
सांस्कृतिक संध्या का संचालन मास्टर शिव ने किया। देर रात तक श्रद्धालु भजनों की अमृतवर्षा में सराबोर होते रहे।
कुल मिलाकर, गुरू वशिष्ठ रामायण कथा का सातवां दिन आध्यात्म, राष्ट्रचिंतन और सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश देकर संपन्न हुआ।
रिपोर्ट : रिज़वान खान
