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17 Apr 2026, Fri

रमजान का महत्व और पवित्रता


रमजान का महीना इस्लाम में सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इसे गुनाहों से निजात पाने का महीना भी कहा जाता है। यह आत्म-अनुशासन, इबादत (प्रार्थना) और दान (सदक़ा) का महीना है। इस महीने में सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोज़ा (व्रत) रखकर, क़ुरआन की तिलावत कर और ज़रूरतमंदों की मदद करके अल्लाह के क़रीब जाने और आत्मा को शुद्ध करने का प्रयास किया जाता है।
रमजान का मुख्य महत्व
1. क़ुरआन का अवतरण – रमजान के दौरान ही पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ पर पवित्र क़ुरआन की आयतें सबसे पहले नाज़िल (प्रकट) हुई थीं।
2. रोज़ा (उपवास) – यह इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है, जो संयम और आत्म-नियंत्रण सिखाता है।
3. आत्म-अनुशासन और सहानुभूति – भूखे-प्यासे रहकर रोज़ेदार भूख और गरीबी का एहसास करते हैं, जिससे दूसरों के प्रति सहानुभूति बढ़ती है।
4. शब-ए-क़द्र (लैलतुल क़द्र) – रमजान के आख़िरी दस दिनों में एक विशेष रात होती है जिसे शब-ए-क़द्र कहा जाता है। यह हज़ार महीनों से बेहतर मानी जाती है।
5. नेकियों का सवाब – इस महीने में किए गए अच्छे कामों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
6. ईद-उल-फ़ित्र – महीने भर की इबादत के बाद ईद-उल-फ़ित्र का त्योहार मनाया जाता है, जो खुशी और भाईचारे का प्रतीक है।
एक गणना के अनुसार चाँद का दीदार 18 फरवरी को हो सकता है। अतः 19 फरवरी से रोज़ा प्रारंभ हो सकता है।

संकलनकर्ता – परमानन्द मिश्रा

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