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15 Oct 2026, Thu

बस्ती में सियासी तापमान तेज: AIMIM में अफजरुलहक उर्फ प्रिंस की एंट्री, प्रशासन कटघरे में

By Aijaz Alam Khan

बस्ती। अफजरुलहक उर्फ प्रिंस की AIMIM में एंट्री ने जनपद की सियासत को नया मोड़ दे दिया है। सैकड़ों समर्थकों के साथ पार्टी में शामिल हुए प्रिंस ने अपने पहले ही संबोधन में व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कई असहज सवाल खड़े कर दिए।


उन्होंने कहा कि बस्ती में हालात ऐसे बनते जा रहे हैं, जहां व्यापार और पहचान को आमने-सामने खड़ा किया जा रहा है। मुरादाबादी-हैदराबादी बिरयानी और चिकन की दुकानों को बंद कराए जाने को उन्होंने सुनियोजित साज़िश बताया। “क्या मेहनत से कमाने वाले छोटे व्यापारी इस देश के नागरिक नहीं हैं? क्या उन्हें सम्मान से जीने का हक नहीं?”
प्रिंस ने कहा कि संविधान हर नागरिक को व्यापार और रोज़गार का अधिकार देता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक खास समुदाय को निशाना बनाकर भय का माहौल बनाया जा रहा है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों पर बोलते हुए प्रिंस ने कहा कि यह गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है, जिस पर भारत सरकार को सख्त रुख अपनाना चाहिए। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी दूसरे देश की घटनाओं के बहाने भारत में नफरत फैलाना और अल्पसंख्यकों को डराना देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब के खिलाफ है।
AIMIM में शामिल होने को लेकर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। प्रिंस ने यह भी कहा “असदुद्दीन ओवैसी ने संसद से सड़क तक मजलूमों की आवाज़ उठाई है। AIMIM वही मंच है, जहां दबे-कुचले लोगों की बात बिना डरे रखी जाती है”
प्रिंस ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द स्थिति नहीं संभाली और न्याय नहीं दिलाया गया तो AIMIM लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आंदोलन करेगी। “हम शांति चाहते हैं, लेकिन अन्याय पर चुप्पी नहीं रहेगी!
इस सियासी घटनाक्रम के बाद यह साफ है कि आने वाले दिनों में बस्ती की राजनीति और ज्यादा गरमाने वाली है, और प्रशासन की भूमिका पर जनता की नजरें टिकी रहेंगी।

रिज़वान खान की रिपोर्ट
AKP News 786