बस्ती। महर्षि वशिष्ठ आश्रम, बढनी मिश्र में आयोजित नौ दिवसीय गुरू वशिष्ठ रामायण कथा का गुरुवार को विधिवत समापन हुआ। कथा के नौवें दिन कथा को विश्राम देते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने श्रीराम वनवास, चित्रकूट सभा, सीता हरण, लक्ष्मण मूर्छा सहित अनेक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया और समसामयिक मुद्दों पर भी खुलकर अपने विचार रखे।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “भारत हिन्दू राष्ट्र बनकर रहेगा”। यूजीसी के नए नियमों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि भारत में जातियां तो थीं, लेकिन जातिवाद नहीं था। उनके अनुसार सत्ता के लोग जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने श्रीराम द्वारा निषादराज और शबरी को सम्मान देने का उल्लेख करते हुए कहा कि रामराज्य में कहीं भी भेदभाव नहीं था।
रामभद्राचार्य ने कहा कि हिन्दू समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने चित्रकूट की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि भजन के लिए चित्रकूट से पवित्र स्थान संसार में नहीं है। उनका कहना था कि जीवात्मा को परमात्मा तक पहुंचने के लिए महात्मा का सान्निध्य आवश्यक है।
कथा के दौरान दशरथ मरण, चरण पादुका प्रसंग, भरत-हनुमान संवाद और रावण के आतंक जैसे प्रसंगों की शोधपरक व्याख्या की गई। उन्होंने मखौड़ा धाम की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि बढनी मिश्र सहित सभी तीर्थों का विकास होगा।
कार्यक्रम में तुलसी पीठ के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास जी महाराज ने गुरु वंदना प्रस्तुत की। मुख्य यजमान चंद्र भूषण मिश्रा और कथा संयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि गुरु कृपा से बढनी मिश्र में महर्षि वशिष्ठ कथा हवन, यज्ञ और भंडारे के साथ सम्पन्न हुई।
नगर पंचायत नगर की अध्यक्ष नीलम सिंह राना, तहसीलदार वीर बहादुर सिंह, ब्लाक प्रमुख यशोवर्धन सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कवि सम्मेलन में गूंजी आध्यात्मिक स्वर लहरियां
कथा से पूर्व वरिष्ठ कवि डॉ. राम कृष्ण लाल ‘जगमग’ की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। संचालन विनोद उपाध्याय ने किया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से बढनी की पावन धरती और गुरु वशिष्ठ की महिमा का गुणगान किया।
डॉ. वी.के. वर्मा की पंक्तियां—
“बढनी की धरती हर्षायी, चहक उठी मन की अमराई…”
को श्रोताओं ने खूब सराहा।
सांस्कृतिक संध्या में कथक की भावपूर्ण प्रस्तुति
कथा के शुभारंभ से पूर्व भव्य सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज के परिवार की 13वीं पीढ़ी से जुड़े कलाकार अनुप और उनकी पत्नी नेहा की युगल प्रस्तुति रही।
दोनों कलाकारों ने कथक शैली में ‘राम विवाह’ प्रसंग को जीवंत कर दिया। सधे हुए पदचालन, भावपूर्ण मुद्राएं और घुंघरुओं की मधुर झंकार ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वयंवर से विवाह तक के दृश्य मंच पर साकार होते दिखाई दिए।
जगद्गुरु के मंच पर आगमन से पूर्व आयोजित इस कार्यक्रम ने सम्पूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया। संचालन मयंक श्रीवास्तव ने किया।
नौ दिवसीय रामकथा यज्ञ, हवन, भंडारे और विविध आध्यात्मिक अनुष्ठानों के साथ सम्पन्न हुई।
रिपोर्ट : रिज़वान खान
