महुली/संत कबीर नगर।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में व्याप्त अनियमितताओं पर लगाम लगाने में जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह विफल नजर आ रहे हैं। आए दिन मनरेगा से जुड़ी धांधलियों की खबरें अखबारों की सुर्खियां बन रही हैं, लेकिन दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई न होने से भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं।
दो दिन पूर्व बीडीओ नाथनगर द्वारा कुछ ग्राम पंचायतों में औचक निरीक्षण कर कार्रवाई का भरोसा जरूर दिलाया गया था, लेकिन यह सख्ती कागजों से आगे बढ़ती नहीं दिखी। जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।

नाथनगर विकास खंड के ग्राम तरयापार में ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की मिलीभगत से मनरेगा में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। रविवार को 12 मस्टरों के अनुसार कागजों में 101 मजदूरों की उपस्थिति दर्शाई गई, जबकि कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल उलट है। मौके पर कोई भी मजदूर कार्य करते नहीं पाया गया। तस्वीरें इस बात का साफ प्रमाण हैं कि केवल कागजी हाजिरी के सहारे सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।
ग्रामीण बसंती, मुनीर, लाल बिहारी, नंदलाल सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी ने मिलकर विकास कार्यों में भारी गड़बड़ियां की हैं। मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ग्रामीणों ने संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि योजना का लाभ वास्तविक मजदूरों तक पहुंच सके।
रिज़वान खान की रिपोर्ट
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