ओडवारा स्वास्थ्य केन्द्र की बदहाल स्थिति

बस्ती मुख्यालय से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ओडवारा की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। यह स्वास्थ्य केन्द्र इन दिनों “सफेद हाथी” बनकर रह गया है, जहां बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव देखने को मिल रहा है।स्वास्थ्य केन्द्र का भवन काफी जर्जर हो चुका है। चारों ओर फैली गंदगी और करकट के बीच किसी तरह मरीजों का इलाज किया जा रहा है। परिसर की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि वर्षों से इसकी देखरेख नहीं की गई है।

शौचालय जर्जर होकर बंद पड़े हैं और स्वच्छता की स्थिति बेहद खराब है।यहां कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी सीमित संसाधनों में किसी तरह अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जो अपने आप में हैरान करने वाली बात है। बावजूद इसके, मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।जानकारी के अनुसार, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में मानकों के तहत एक एमबीबीएस डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन, ओपीडी, प्रसव सुविधा, टीकाकरण, मुफ्त दवा और जांच जैसी सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए।

ये केन्द्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और सामान्य बीमारियों के उपचार के लिए अहम भूमिका निभाते हैं।लेकिन ओडवारा स्वास्थ्य केन्द्र में स्थिति इसके विपरीत नजर आती है। अस्पताल में मौजूद करीब आधा दर्जन बेड अनुपयोगी पड़े हैं, पीने के पानी की व्यवस्था ठप है और वाटर पोस्ट खराब पड़ा हुआ है। परिसर में कबाड़ का अंबार लगा हुआ है।वहीं, कागजों में आकस्मिक सेवा के लिए तीन एम्बुलेंस उपलब्ध बताई जाती हैं, लेकिन मौके पर एक भी एम्बुलेंस मौजूद नहीं मिली। इस संबंध में जब फार्मासिस्ट से जानकारी ली गई तो वे स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकीं।

उनका कहना था कि यहां आयुष्मान योजना के तहत सुविधा उपलब्ध नहीं है और सभी सरकारी सुविधाएं हर जगह उपलब्ध नहीं हो पातीं।अब बड़ा सवाल यह है कि जब प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की यह स्थिति होगी, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं किस तरह सुदृढ़ होंगी। प्रशासन और संबंधित विभाग को इस ओर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट : परमानन्द मिश्रा
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