बस्ती जनपद के नगर पालिका परिषद, बस्ती क्षेत्र के नरहरिया वार्ड संख्या एक में जल निकासी को लेकर एक नया विवाद उभरकर सामने आया है। स्थानीय स्तर पर कुछ महिलाओं द्वारा नाली निर्माण की मांग किए जाने के बाद मामला लगातार गरमाता जा रहा है और अब यह मुद्दा जनचर्चा का विषय बन चुका है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गाटा संख्या 386 एवं 387 से संबंधित भूमि, जो “राम लाल बनाम बंगाली” प्रकरण के तहत दीवानी न्यायालय में विचाराधीन है, पर पहले ही नगर पालिका द्वारा बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के आरसीसी सड़क का निर्माण कराया जा चुका है। अब इसी विवादित भूमि पर जल निकासी के नाम पर खुदाई कर सीवरेज पाइप लाइन बिछाने की तैयारी किए जाने से स्थिति और संवेदनशील हो गई है।

पीड़ित पक्ष, जिसमें 74 वर्षीय राम लाल प्रमुख रूप से शामिल हैं, ने इस कार्रवाई को पूरी तरह गैरकानूनी बताते हुए न्यायालय की अवमानना के समान करार दिया है। उनका कहना है कि जल निकासी की समस्या वास्तविक नहीं है, बल्कि पूर्व में निर्मित नालियों के जाम होने के कारण उत्पन्न हुई है, जिसमें स्थानीय स्तर पर कूड़ा-करकट डाले जाने की अहम भूमिका रही है।
पीड़ितों का यह भी आरोप है कि कुछ महिलाएं, जो कथित तौर पर बाहरी प्रभाव में हैं, नाली निर्माण के मुद्दे को हवा देकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही हैं। साथ ही, अधिशाषी अधिकारी की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप है कि न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद वे निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में रुचि दिखा रहे हैं।
हालांकि, इस पूरे मामले में अधिशाषी अधिकारी की ओर से शिकायत पोर्टल पर दिए गए जवाब में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित गाटा संख्या का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। साथ ही राजस्व लेखपाल की रिपोर्ट के अनुसार, राम लाल की भूमि पर किसी भी सरकारी नाली का रिकॉर्ड दर्ज नहीं है।
इसके बावजूद, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उन पर दबाव बनाकर निर्माण कार्य के लिए मजबूर किया जा रहा है, यहां तक कि प्राथमिकी दर्ज कराने की चेतावनी भी दी जा रही है, जिससे वे मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की निगाहें न्यायालय के अंतिम फैसले और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट
