नाबालिग पीड़िता बरामद: परसरामपुर पुलिस की सक्रियता से सुरक्षित मिली किशोरी
नाबालिग पीड़िता बरामद मामले में बस्ती जिले की परसरामपुर पुलिस ने तेज कार्रवाई करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। थाना परसरामपुर क्षेत्र से लापता हुई लगभग 15 वर्षीय किशोरी को पुलिस टीम ने खोजबीन और सुरागरसी के बाद सुरक्षित बरामद कर लिया। इस कार्रवाई से एक बार फिर यह साबित हुआ है कि प्रशासन महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह मामला 8 मार्च 2026 को दर्ज किया गया था। इसके बाद से लगातार पुलिस टीम किशोरी की तलाश में जुटी हुई थी। जांच के दौरान कई स्थानों पर छानबीन की गई और स्थानीय लोगों से भी जानकारी ली गई। आखिरकार प्रयास सफल हुए और नाबालिग पीड़िता बरामद कर ली गई।
मामले की पृष्ठभूमि और दर्ज हुई रिपोर्ट
जानकारी के अनुसार थाना परसरामपुर में 8 मार्च 2026 को एक मामला दर्ज किया गया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) और 87 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया। रिपोर्ट में बताया गया था कि एक नाबालिग लड़की अचानक लापता हो गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। अधिकारियों ने जांच टीम गठित की और संभावित स्थानों पर तलाश शुरू की। पुलिस की प्राथमिकता यह थी कि नाबालिग पीड़िता बरामद जल्द से जल्द की जाए ताकि उसे सुरक्षित घर लाया जा सके।
पुलिस टीम की रणनीति और खोजबीन
थानाध्यक्ष विश्वमोहन राय के नेतृत्व में पुलिस टीम ने लगातार इलाके में तलाश जारी रखी। पुलिस ने पतारसी और सुरागरसी की मदद से कई महत्वपूर्ण सुराग जुटाए। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ाई गई ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
पुलिस टीम ने तकनीकी और स्थानीय सूचना दोनों का इस्तेमाल किया। इसी रणनीति के चलते पुलिस को अहम जानकारी मिली और उसी आधार पर कार्रवाई करते हुए नाबालिग पीड़िता बरामद कर ली गई। यह पूरी कार्रवाई बेहद सतर्कता और समझदारी के साथ की गई ताकि लड़की को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
सुरक्षित बरामदगी के बाद कानूनी प्रक्रिया
नाबालिग पीड़िता बरामद होने के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। किशोरी को पूरी सुरक्षा के साथ पुलिस अभिरक्षा में लिया गया और उसके स्वास्थ्य तथा सुरक्षा की जांच की गई। इसके बाद विधिक कार्यवाही के तहत उसे बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया।
बाल कल्याण समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि बच्चे के अधिकार सुरक्षित रहें और उसकी भलाई के लिए सही निर्णय लिया जाए। इसलिए नाबालिग पीड़िता बरामद होने के बाद इस प्रक्रिया को पूरा करना आवश्यक माना जाता है।
कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम
इस सफल कार्रवाई में थाना परसरामपुर पुलिस की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम में उप निरीक्षक अशोक कुमार और महिला कांस्टेबल प्रियंका मौर्या शामिल थीं। दोनों अधिकारियों ने लगातार प्रयास कर इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी होती है। अगर समय रहते खोजबीन शुरू कर दी जाए तो पीड़ित को सुरक्षित ढूंढने की संभावना बढ़ जाती है। इसी वजह से इस मामले में भी तुरंत कार्रवाई की गई और नाबालिग पीड़िता बरामद हो गई।
समाज और प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण संदेश
यह घटना समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि बच्चों की सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी है। यदि किसी भी बच्चे के साथ ऐसी स्थिति सामने आती है तो तुरंत पुलिस को सूचना देना चाहिए। इससे समय रहते मदद मिल सकती है और बड़ा खतरा टाला जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस और समाज के बीच बेहतर सहयोग से इस तरह के मामलों को जल्दी सुलझाया जा सकता है। नाबालिग पीड़िता बरामद जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि अगर प्रशासन सक्रिय हो तो पीड़ितों को जल्दी राहत मिल सकती है।
बस्ती पुलिस की यह कार्रवाई न केवल एक सफल ऑपरेशन है बल्कि यह संदेश भी देती है कि कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। इससे लोगों का भरोसा पुलिस व्यवस्था पर और अधिक मजबूत होता है।
रिपोर्ट : परमानंद मिश्रा
