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15 Oct 2026, Thu

रमज़ान का महत्व और उसकी बरकतें” ✨

By Aijaz Alam Khan (Editor)

रमज़ान इस्लामी कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना है, जिसमें रोज़ा, व्रत और नमाज़ के ज़रिये अल्लाह की कृपा मिलती है। यह महीना आत्मशुद्धि, सब्र और सेवा की शिक्षा देता है। यह पवित्र कुरान के अवतरण का प्रतीक है और ज़कात की भावना सिखाता है। जो बुराइयों से दूर रहकर त्याग, अच्छे विचार और ज़रूरतमंदों के प्रति सहानुभूति का संदेश देता है।
इसी महीने में खुदा के मार्गदर्शन के लिए पवित्र कुरान नाज़िल किया गया। रमज़ान के महीने का महत्व – कुरान का अवतरण, रोज़ा और इबादत है।


अल्लाह के क़रीब आना – इस महीने में इबादत का बहुत महत्व है।


शब-ए-क़द्र (लैलतुल क़द्र) – रमज़ान के आख़िरी अशरे की ताक (विषम) रातों में लैलतुल क़द्र की तलाश की जाती है। इन पाँच ताक रातों को खास माना जाता है:
21वीं रात
23वीं रात
25वीं रात
27वीं रात
29वीं रात
इन रातों में नमाज़, कुरान की तिलावत, ज़िक्र और दुआ करने का बहुत बड़ा सवाब मिलता है। माना जाता है कि लैलतुल क़द्र की रात हज़ार महीनों से बेहतर है, इसलिए मुसलमान इन ताक रातों में ज्यादा से ज्यादा इबादत करते हैं।
आध्यात्मिक विकास – यह रुहानी और जिस्मानी तौर पर खुद को बेहतर बनाने का महीना है।
रोज़ा का महत्व – तक़वा (परहेज़गारी)
रोज़ा केवल भूखे-प्यासे रहना नहीं है, बल्कि बुराइयों से बचना और दिल में प्यार पैदा करना है।
आत्म संयम – यह उपवास आत्मसंयम सिखाता है। भूख-प्यास का एहसास कराकर गरीबों के प्रति सहानुभूति जागृत करता है।
स्वास्थ्य लाभ – यह शरीर को विषैले पदार्थों से मुक्त करने और अनुशासन सिखाने का जरिया भी है।
नमाज़ का महत्व – अनिवार्य नमाज़ों को रमज़ान में ज्यादा शिद्दत से पढ़ना आत्मिक मजबूती देता है।
तरावीह की नमाज़ – रात में पढ़ी जाने वाली विशेष नमाज़, जो कुरान को सुनने का अवसर देती है।

संकलनकर्ता : परमानन्द मिश्रा

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