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17 Apr 2026, Fri

बस्ती: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पर महुआ डाबर में होगा ऐतिहासिक स्मरण आयोजन

By Aijaz Alam Khan

बस्ती: महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा नेताजी सुभाष बोस की 129वीं जयंती पर क्रांति की धरती महुआ डाबर में यादगार आयोजन करने की तैयारियां चल रही हैं. जिसमें आजादी की मशाल जलाने वाले क्रांतिकारियों  के वंशज, लोक संस्कृति के जुड़े कलाकार, इतिहास और अकादमिक जगत से जुड़े विभिन्न विद्वान हिस्सा लेंगे।


     देश की स्वतंत्रता के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के क्रांतिकारी संघर्ष की कहानी से हम सभी परिचित हैं। किंतु इस संघर्ष को सफल बनाने में नेताजी के साथ उस दौर में आज़ादी का बिगुल बजाने वाले अनेक क्रांतिकारियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा था। यदि उनका निःस्वार्थ सहयोग न होता, तो नेताजी देश के लिए वह ऐतिहासिक कार्य संभवतः नहीं कर पाते, जिसने इतिहास को नया मोड दिया।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर, उन सभी गुमनाम नायकों को जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना नेताजी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया, महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा उन सभी जाने-अनजाने सेनानियों को स्मरण दिवस पर याद किया जा रहा है.
आगामी 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार) को महुआ डाबर म्यूजियम, जिला बस्ती के बहादुरपुर ब्लॉक अंतर्गत महुआ डाबर में आयोजित कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है—
दोपहर 2:00 बजे
   अतिथियों का महुआ डाबर क्रांतिस्थल एवं संग्रहालय अवलोकन
दोपहर 3:00 बजे से
      “आज़ाद हिन्द फ़ौज और बस्ती” विषय पर संवाद, महुआ डाबर तिराहा
सायं 5:30 बजे
     सहभोज, मनोरमा तट
महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक और क्रांतिकारी लेखक डॉ. शाह आलम राणा ने जानकारी देते हुए कहा कि बस्ती जिले के आजाद हिंद फौज सेनानियों के वंशजों को सम्मानित करने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है. उनसे निवेदन किया गया है कि अपने जांबाज पुरखों से संबंधित दस्तावेज साथ लेकर आए ताकि नई पीढ़ी भी उनके संघर्ष की ताप को महसूस कर सके. श्री राणा ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए समस्त जनों से इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है.
महुआ डाबर संग्रहालय उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल पर स्थित है. जहाँ स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, किताबें, पत्रिकाएं, शहीदों के पत्र, हस्तलिखित नोट्स, ऐतिहासिक दस्तावेज़, सिक्के और प्राचीन मुद्राएं हैं, जो गुमनाम नायकों की कहानी बताती हैं. दरअसल यह गांव 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी सरकार के खिलाफ एक बड़े विद्रोह का केंद्र था, जिसके प्रतिशोध में अंग्रेजों ने पांच हजार आबादी वाले इस गांव को पूरी तरह जलाकर खाक कर दिया था. ढाई दशक पहले उसी गौरवशाली इतिहास को संरक्षित करने के लिए संग्रहालय की नींव रखी गई थी

ब्यूरो रिपोर्ट
AKP News 786