🕌 लैलातुल जाईज़ा — इनाम की रात, रहमत की सौगात
आलम रूहानी मिशन ट्रस्ट की जानिब से खास पैग़ाम
लैलातुल जाईज़ा वह मुबारक रात है जो माहे रमज़ान के आख़िरी रोज़े (चांद रात), ईद-उल-फ़ितर से ठीक पहले आती है। यह रात अल्लाह तआला की तरफ से अपने बंदों के लिए इनाम और रहमत की रात होती है।
माहे रमज़ान का मुकद्दस महीना अपने आखिर की तरफ बढ़ता है, तो दिलों में एक अजीब सी कैफियत होती है—खुशी भी और जुदाई का एहसास भी। इन्हीं लम्हों में एक बेहद अज़ीम और बरकतों वाली रात आती है, जिसे लैलातुल जाईज़ा यानी इनाम की रात कहा जाता है।
यह वह रात है जब अल्लाह तआला अपने बंदों को पूरे रमज़ान में किए गए रोज़ों, नमाज़ों, तिलावतों और सब्र का बेहतरीन अज्र अता फरमाता है। यह रात दरअसल मेहनत के बाद मिलने वाले इनाम की तरह है—जहाँ बंदा अपने रब के सामने झुककर अपनी कोशिशों का सिला पाता है।

लैलातुल जाईज़ा हमें यह पैग़ाम देती है कि जो वक्त हमने अल्लाह की राह में गुजारा, जो आंसू हमने तौबा में बहाए, और जो सब्र हमने अपनी ख्वाहिशों पर किया—वह सब बेकार नहीं गया। यह रात यकीन दिलाती है कि अल्लाह अपने बंदों की छोटी से छोटी नेकी को भी संभाल कर रखता है और उसका बदला अता करता है।
आज जरूरत इस बात की है कि हम इस मुबारक रात को गफलत और लापरवाही में न बिताएं, बल्कि इसे इबादत और दुआओं से रोशन करें। अपने रब से अपने गुनाहों की माफी मांगें, दिल की गहराइयों से तौबा करें और एक नई, पाक जिंदगी की शुरुआत का इरादा करें।
साथ ही, इस रात हमें इंसानियत की खिदमत का भी एहसास करना चाहिए—गरीबों, यतीमों और जरूरतमंदों की मदद करके हम इस रात की बरकतों को और भी बढ़ा सकते हैं। यही असली रूह है रमज़ान की और यही पैग़ाम है ईद की खुशियों का।
आइए, इस मुकद्दस रात लैलातुल जाईज़ा को पूरी शिद्दत के साथ इबादत में गुज़ारें, अपने दिलों को रौशन करें और अपने आमाल को बेहतर बनाने का अहद करें। यह रात हमें सिखाती है कि असली कामयाबी सिर्फ दुनियावी नहीं, बल्कि आख़िरत की कामयाबी है—और वह उन्हीं को मिलती है जो सच्चे दिल से अपने रब की तरफ रुजू करते हैं।
आलम रूहानी मिशन ट्रस्ट तमाम अहले-इस्लाम से गुज़ारिश करता है कि इस बरकतों भरी रात में अपने लिए, अपने घरवालों के लिए और पूरे मुल्क व उम्मत के लिए ख़ास दुआएं करें। अल्लाह तआला हम सबकी इबादतों को क़ुबूल फरमाए, हमारे गुनाहों को माफ़ करे और हमें नेक रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ अता करे।
दुआ:
या अल्लाह! हम सबको माहे रमज़ान की बरकतों से भरपूर हिस्सा अता फरमा, हमारी इबादतों को कबूल कर, हमारे गुनाहों को माफ़ कर दे और हमें अपनी रहमतों का हक़दार बना। हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी अता फरमा। आमीन।
✨ सूफ़ी एजाज़ आलम खान क़ादरी
अध्यक्ष, आलम रूहानी मिशन ट्रस्ट
संपादक, AKP News 786
सम्पर्क न0 9451437422
