13 मार्च (शुक्रवार) को अदा की जाएगी नमाज़-ए-अलविदा
अनुमानित समय: दोपहर 12:45 से 1:30 बजे तक
रमज़ान मुबारक के पवित्र महीने का आख़िरी जुम्मा नमाज़-ए-अलविदा के रूप में अदा किया जाता है। यह दिन पवित्र महीने की विदाई और अल्लाह की इबादत के चरम का प्रतीक माना जाता है। इस दिन मुसलमान मस्जिदों में बड़ी संख्या में जमा होकर नमाज़ अदा करते हैं और अल्लाह से गुनाहों की माफी, रहमत, बरकत तथा देश-दुनिया में अमन-शांति की दुआ माँगते हैं।
नमाज़-ए-अलविदा का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार अलविदा जुम्मा के दिन की गई इबादत और दुआओं से अल्लाह बंदों की गलतियों को माफ कर देता है। इस दिन इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
पवित्र महीने की विदाई:
रमज़ान के पूरे महीने के रोज़े और इबादत के बाद यह दिन रूहानी सफर का आख़िरी पड़ाव माना जाता है, जो ईद-उल-फितर के आगमन का संकेत देता है।
विशेष दुआएँ:
इस दिन मस्जिदों में भारी भीड़ होती है और लोग अपनी जायज़ मुरादों की पूर्ति, देश-दुनिया में अमन और खुशहाली की दुआ माँगते हैं।
नेक कामों की याद:
अलविदा जुम्मा यह संदेश देता है कि रमज़ान के बाद भी नेक कामों और अल्लाह की इबादत का सिलसिला जारी रखना चाहिए।
इंसानियत और भाईचारे का संदेश:
यह दिन भाईचारे, इंसानियत और शांति का पैगाम देता है, जब लोग एक साथ मिलकर नमाज़ अदा करते हैं।
नमाज़ का तरीका
अलविदा जुम्मा के दिन मस्जिदों में सामूहिक रूप से नमाज़ अदा की जाती है और खास तौर पर तौबा (पश्चाताप) तथा इबादत की कबूलियत के लिए दुआ की जाती है।
नमाज़ की रकअतें:
4 रकअत सुन्नत
2 रकअत फ़र्ज़
4 रकअत सुन्नत
2 रकअत नफ़्ल
संकलनकर्ता : परमानन्द मिश्रा

