Breaking: बस्ती में चल रही 8 दिवसीय कथक कार्यशाला में भरतनाट्यम की शानदार एंट्री, बच्चों के उत्साह ने जीता सभी का दिल।

कथक कार्यशाला बस्ती में भरतनाट्यम का बड़ा आकर्षण, बच्चों ने सीखे शास्त्रीय नृत्य के विशेष गुर
कथक कार्यशाला बस्ती इन दिनों कला और संस्कृति प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। महर्षि गुरु वशिष्ठ की तपोभूमि वशिष्ठ नगर, बस्ती में आयोजित 8 दिवसीय नृत्य कार्यशाला के चौथे दिन एक विशेष आकर्षण देखने को मिला। पश्चिम बंगाल के कोलकाता से आईं प्रसिद्ध भरतनाट्यम प्रशिक्षिका सृजिता सरकार और उनकी टीम ने बच्चों को शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया। बच्चों का उत्साह और सीखने की लगन देखकर प्रशिक्षकों ने भी उनकी जमकर सराहना की।
यह आयोजन नृत्य धाम कथक अकादमी द्वारा किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। कार्यशाला के चौथे दिन बच्चों को भरतनाट्यम की प्रवेशिका, बेसिक तत्तुअडवु, अरमंडी, हस्त मुद्राएं तथा ताल की महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
कथक कार्यशाला बस्ती में भरतनाट्यम प्रशिक्षण का विशेष सत्र
प्रशिक्षिका सृजिता सरकार ने बच्चों को भरतनाट्यम के प्रारंभिक चरणों का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि भरतनाट्यम भारत की सबसे प्राचीन और अनुशासित शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है। इसकी शुरुआती तकनीकों को सीखना बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन बस्ती के विद्यार्थियों ने जिस समर्पण और उत्साह का परिचय दिया, वह सराहनीय है।
प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को ‘अरमंडी’ मुद्रा का अभ्यास कराया गया, जिसमें घुटनों को मोड़कर आधा बैठने की स्थिति बनाई जाती है। इसके अलावा संयुक्त हस्त मुद्राएं, असंयुक्त हस्त मुद्राएं तथा ताल की समझ विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
सृजिता सरकार ने कहा कि शुरुआती दिनों में यह नृत्य शैली थोड़ी कठिन प्रतीत होती है, लेकिन बच्चों ने बहुत कम समय में मूलभूत अभ्यासों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह उनकी मेहनत और कला के प्रति लगाव को दर्शाता है।
शास्त्रीय नृत्य की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास
कथक गुरु मास्टर शिव ने बताया कि यह कार्यशाला केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विरासत को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अभियान है। उनका कहना है कि आज के डिजिटल दौर में बच्चों को भारतीय संस्कृति और कला से जोड़ना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कथक कार्यशाला बस्ती आने वाले वर्षों में क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। शास्त्रीय नृत्य के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि इस बात का संकेत है कि भारतीय कला की जड़ें आज भी मजबूत हैं।
मास्टर शिव ने यह भी कहा कि नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि व्यक्तित्व विकास, अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाने का सशक्त साधन है।
विद्यार्थियों का उत्साह बना चर्चा का विषय
कार्यशाला में भाग लेने वाले विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षकों के अनुसार बच्चों की सीखने की गति और समर्पण ने सभी को प्रभावित किया है।
इस दौरान शानवी वर्मा, आर्ची कश्यप, गौरी प्रजापति, अवि त्रिपाठी, ऐश्वर्या सिंह, संगीता उपाध्याय, ममता यादव, पिंकी, रजनी और सृष्टि मिश्रा सहित कई विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाई।
बच्चों ने न केवल भरतनाट्यम की मूलभूत तकनीकों को सीखा बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि को भी समझने का प्रयास किया।
कोलकाता से आई विशेषज्ञ टीम ने बढ़ाया कार्यक्रम का गौरव
कार्यशाला में प्रशिक्षिका सृजिता सरकार के साथ शालिनी, श्रेया जोद्दार और शिति टिकादर की टीम भी मौजूद रही। इन विशेषज्ञ कलाकारों ने विद्यार्थियों को तकनीकी अभ्यासों के साथ-साथ मंच प्रदर्शन की आवश्यक जानकारियां भी दीं।
विशेषज्ञों ने बच्चों को बताया कि शास्त्रीय नृत्य केवल कला नहीं बल्कि एक साधना है, जिसमें निरंतर अभ्यास और अनुशासन की आवश्यकता होती है।
कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों को अपनी संस्कृति के करीब आने का अवसर मिलता है।
कथक कार्यशाला बस्ती क्यों बन रही है मिसाल?
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे शहरों में इस प्रकार की शास्त्रीय कला कार्यशालाएं प्रतिभाओं को नया मंच प्रदान करती हैं। बस्ती में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल स्थानीय कलाकारों के लिए प्रेरणादायक है बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
कला जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि इस प्रकार के आयोजन लगातार होते रहे तो आने वाले समय में बस्ती भी शास्त्रीय नृत्य के महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल हो सकता है।
यही कारण है कि कथक कार्यशाला बस्ती को क्षेत्र की सांस्कृतिक उन्नति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
बस्ती में आयोजित 8 दिवसीय नृत्य कार्यशाला का चौथा दिन बच्चों के लिए नई सीख और नए अनुभव लेकर आया। भरतनाट्यम प्रशिक्षिका सृजिता सरकार और उनकी टीम के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने शास्त्रीय नृत्य की महत्वपूर्ण तकनीकों को सीखा। यह कार्यशाला भारतीय संस्कृति और कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक सराहनीय पहल साबित हो रही है।