साइबर ठगी से वापस मिले 50 हजार रुपये
साइबर ठगी से वापस मिले 50 हजार रुपये, रुधौली पुलिस की त्वरित कार्रवाई से पीड़ित को मिली राहत
साइबर ठगी से वापस मिले 50 हजार रुपये की यह खबर उन लोगों के लिए बड़ी सीख है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। बस्ती जिले के रुधौली थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति साइबर अपराधियों का शिकार हो गया था, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते उसकी पूरी रकम वापस मिल गई। यह मामला न केवल पुलिस की सक्रियता को दर्शाता है बल्कि आम लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक भी करता है।
आज के डिजिटल दौर में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे में रुधौली पुलिस की यह कार्रवाई एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।
साइबर ठगी से वापस मिले 50 हजार रुपये: क्या था पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 20 जून 2026 को विरेंद्र यादव पुत्र रामकेवल यादव निवासी मरवटीया आसरे, थाना रुधौली ने साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायतकर्ता ने बताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनका व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया। इसके बाद उन्हें एक एपीके (APK) फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया गया। जैसे ही उन्होंने फाइल डाउनलोड की, साइबर अपराधियों ने उनके खाते से 50,000 रुपये ट्रांसफर कर लिए।
पीड़ित ने तुरंत इस घटना की जानकारी दी और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत संख्या 33105260100666 के आधार पर मामला दर्ज किया गया।
रुधौली पुलिस की त्वरित कार्रवाई
साइबर ठगी से वापस मिले 50 हजार रुपये की इस सफलता के पीछे रुधौली पुलिस की तेज और प्रभावी कार्रवाई रही।
पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के निर्देश पर, अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत के निर्देशन तथा क्षेत्राधिकारी रुधौली कुलदीप सिंह यादव के नेतृत्व में साइबर सेल सक्रिय हुई।
प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार दुबे, साइबर प्रभारी उप निरीक्षक एजाज अहमद, कांस्टेबल सर्वदानन्द यादव एवं कांस्टेबल सतीश चन्द्र की टीम ने मामले की जांच शुरू की।
तकनीकी विश्लेषण और त्वरित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से साइबर सेल ने संबंधित खाते में रकम को लियन कराया और पूरी धनराशि शिकायतकर्ता के खाते में वापस कराई।
पीड़ित ने पुलिस को कहा धन्यवाद
राशि वापस मिलने के बाद विरेंद्र यादव ने रुधौली पुलिस और बस्ती पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस समय पर कार्रवाई नहीं करती तो उनकी मेहनत की कमाई वापस मिलना मुश्किल हो जाता।
पीड़ित ने पुलिस की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि साइबर सेल ने बेहद तेजी और जिम्मेदारी के साथ मामले को निपटाया।
साइबर अपराधियों का नया तरीका
विशेषज्ञों के अनुसार, एपीके फाइल के जरिए साइबर अपराधी मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल कर देते हैं। इसके बाद वे बैंकिंग जानकारी, ओटीपी और अन्य संवेदनशील डेटा तक पहुंच बना लेते हैं।
व्हाट्सएप हैकिंग, फर्जी लिंक, स्क्रीन शेयरिंग ऐप और नकली कस्टमर केयर कॉल आज साइबर अपराधियों के प्रमुख हथियार बन चुके हैं।
- अनजान एपीके फाइल डाउनलोड न करें।
- संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।
- बैंकिंग जानकारी गोपनीय रखें।
- दो-स्तरीय सुरक्षा (Two-Factor Authentication) का उपयोग करें।
साइबर सेल रुधौली की जनता से अपील
रुधौली साइबर सेल ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर एपीके फाइल डाउनलोड न करें। किसी भी लिंक या एप्लिकेशन की सत्यता की जांच अवश्य करें।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर फ्रॉड होता है तो वह बिना देरी किए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करे या NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए।
समय पर शिकायत करने से रकम वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
साइबर ठगी से बचाव के लिए जरूरी सुझाव
- फोन में केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करें।
- अनजान नंबरों से आने वाले मैसेज और लिंक से सावधान रहें।
- बैंक खाते से जुड़ी जानकारी किसी को न दें।
- मोबाइल और बैंकिंग ऐप को नियमित रूप से अपडेट रखें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
साइबर ठगी से वापस मिले 50 हजार रुपये का यह मामला बताता है कि समय पर शिकायत और पुलिस की सक्रियता से साइबर अपराध के मामलों में राहत मिल सकती है। रुधौली पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया है कि जागरूकता और त्वरित कदम उठाने से आर्थिक नुकसान को रोका जा सकता है।
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AKP News 786