Breaking: बस्ती में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बड़ा आयोजन, भाजपा नेताओं और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को दिए महत्वपूर्ण सुझाव। h1>प्राकृतिक खेती कार्यशाला बस्ती: किसानों को मिली नई दिशा, प्राकृतिक खेती और मोटे अनाज पर जोर

प्राकृतिक खेती कार्यशाला बस्ती में गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र बंजरिया में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती, पशुपालन और सरकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कामेश्वर सिंह, पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ला, मुख्य विकास अधिकारी सार्थक अग्रवाल सहित कई जनप्रतिनिधि और कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे।
कार्यक्रम का उद्घाटन फीता काटकर किया गया। इसके बाद अतिथियों ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया और किसानों से संवाद स्थापित किया। कृषि विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन के लिए प्रेरित करना था।
प्राकृतिक खेती कार्यशाला बस्ती में किसानों को मिला विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करके खेती की लागत घटाई जा सकती है और मिट्टी की गुणवत्ता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

किसानों को जैविक संसाधनों के उपयोग, गो आधारित खेती और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों के लाभों के बारे में भी बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि बदलते समय में प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
भाजपा किसान मोर्चा नेताओं ने किसानों से की विशेष अपील
जिलाध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा दिलीप कुमार पाण्डेय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार योजनाएं चला रही है। उन्होंने कहा कि बस्ती के किसान अपने परिश्रम और नवाचार से प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
क्षेत्रीय अध्यक्ष गोपेश्वर त्रिपाठी ने किसानों को प्राकृतिक खेती के साथ पशुपालन अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इससे रसायनों का उपयोग कम होगा और खाद्यान्न अधिक सुरक्षित एवं पौष्टिक बनेंगे।
पूर्व विधायक दयाराम चौधरी ने किसानों से मोटे अनाज की खेती बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज में भरपूर पोषक तत्व होते हैं और इसे सुपर फूड माना जाता है।
सरकारी योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी
पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों के लिए कई लाभकारी योजनाएं चला रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, सोलर पंप योजना, मिट्टी जांच कार्यक्रम और ट्यूबवेल बिजली बिल राहत जैसी योजनाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने किसानों से इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। उनके अनुसार आधुनिक तकनीक और सरकारी सहायता का सही उपयोग किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है।
प्राकृतिक खेती कार्यशाला बस्ती में मोटे अनाज और स्वास्थ्य पर जोर
उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ला ने कहा कि मोटे अनाज का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। उन्होंने बताया कि मोटे अनाज के नियमित उपयोग से ब्लड प्रेशर, मधुमेह और गठिया जैसी बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
उन्होंने किसानों से मोटे अनाज की खेती बढ़ाने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य भी प्राप्त हो सकता है।
उर्वरकों के संतुलित उपयोग की दी सलाह
प्रदेश अध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा कामेश्वर सिंह ने किसानों से अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि अधिक उर्वरक उपयोग से खेती की लागत बढ़ती है और खाद्यान्न में रसायनों की मात्रा भी बढ़ जाती है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे पहले मिट्टी की जांच कराएं और फिर स्वायल हेल्थ कार्ड में दी गई सिफारिशों के अनुसार ही उर्वरकों का उपयोग करें। इससे लागत कम होगी और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होगी।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले किसानों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान उन किसानों को सम्मानित किया गया जो लंबे समय से गो आधारित और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। अतिथियों ने उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया और अन्य किसानों को भी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ सकें।
निष्कर्ष
प्राकृतिक खेती कार्यशाला बस्ती किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। कार्यक्रम में विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने किसानों को प्राकृतिक खेती, मोटे अनाज, पशुपालन और सरकारी योजनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। आने वाले समय में ऐसे कार्यक्रम किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
FAQ
प्राकृतिक खेती कार्यशाला कहां आयोजित हुई?
कृषि विज्ञान केंद्र बंजरिया, बस्ती में आयोजित हुई।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?
किसानों को प्राकृतिक खेती और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना।
कार्यक्रम में किन प्रमुख नेताओं ने भाग लिया?
कामेश्वर सिंह, हरीश द्विवेदी, महेश शुक्ला सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।
किसानों को क्या सलाह दी गई?
प्राकृतिक खेती, पशुपालन, मोटे अनाज की खेती और मिट्टी जांच के आधार पर उर्वरक उपयोग की सलाह दी गई।
रिपोर्ट : रिजवान खान
AKP News 786