सूफ़ी एजाज़ आलम ख़ान क़ादरी का भावुक संदेश
सबके नसीब में कहाँ होती हैं वो गर्मियों की छुट्टियाँ,
जहाँ मामू-मोमानी का प्यार और अपनापन मिलता है।
बहुत से बच्चे ऐसे भी होते हैं जो एक फ़ोन, एक बुलावे और एक प्यार भरे सवाल का इंतज़ार करते रहते हैं कि,
“बाबू! गर्मी की छुट्टियाँ कैसी चल रही हैं?”
मगर अफ़सोस, कुछ रिश्ते इतने दूर हो जाते हैं कि हाल पूछना भी ज़रूरी नहीं समझते। शायद उन्हें यह डर होता है कि कहीं बहन और भांजे-भांजियाँ को बुलाना न पड़ जाए।
सूफ़ी एजाज़ क़ादरी कहते हैं कि रिश्तों की खूबसूरती सिर्फ़ ख़ून के रिश्ते होने में नहीं, बल्कि उन्हें मोहब्बत, ख़ुलूस और एहसास के साथ निभाने में है। बच्चे महंगे तोहफ़ों के नहीं, बल्कि अपनों की तवज्जो, प्यार और अपनापन के मोहताज होते हैं।
याद रखिए, एक प्यार भरा फ़ोन, एक हालचाल और एक छोटी-सी दावत भी बच्चों के दिल में ऐसी खुशियाँ भर देती है, जिन्हें वे उम्र भर नहीं भूलते।
“अपनों को याद रखना भी इबादत जैसा अमल है, और उन्हें भूल जाना रिश्तों की सबसे बड़ी ग़रीबी।”

— सूफ़ी एजाज़ आलम ख़ान क़ादरी 🥀🤍
अध्यक्ष, आलम रूहानी मिशन ट्रस्ट, बस्ती
संपर्क & व्हाट्सअप नंबर – 9451437422