संपादकीय
बस्ती। पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानी जाती है, जिसका मूल उद्देश्य समाज की आवाज उठाना, सच को सामने लाना और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता देना है। लेकिन वर्तमान समय में कुछ लोग पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। केवल दो-चार बैनरों में नाम जोड़कर स्वयं को पत्रकार बताने वाले ऐसे तथाकथित लोग पत्रकारिता की आड़ में ब्लैकमेलिंग और अवैध धन उगाही जैसी गतिविधियों में संलिप्त बताए जाते हैं।

देखने में आता है कि कुछ लोग कई संस्थानों के पहचान पत्र साथ लेकर चलते हैं और परिस्थिति के अनुसार किसी भी संस्था का कार्ड दिखाकर अस्पतालों, स्कूलों, सरकारी विभागों तथा निजी प्रतिष्ठानों पर दबाव बनाने का प्रयास करते हैं।

इस प्रकार की गतिविधियां न केवल वास्तविक एवं निष्पक्ष पत्रकारों की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि समाज और संस्थानों का विश्वास भी कमजोर करती हैं।आवश्यक है कि प्रशासन ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार और सम्मानित क्षेत्र की गरिमा बनी रहे। सच्ची पत्रकारिता समाज का मार्गदर्शन करती है, जबकि ब्लैकमेलिंग और ठगी करने वाले तत्व इस पवित्र पेशे को बदनाम करने का काम करते हैं।
जनहित में ऐसे लोगों पर प्रभावी रोक लगाना समय की मांग है।
