बस्ती में Mother’s Day पर भावुक कार्यक्रम, बच्चों ने माँ की मोहब्बत और सीख को किया याद
बस्ती:मदर्स डे कार्यक्रम बस्ती के तहत दारुल उलूम इस्लामिया फैज़ाने आलम, दमया परसा में “माँ की सीख” विषय पर एक भावुक एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी माँ से मिली सीख, परवरिश और मोहब्बत को बेहद भावुक अंदाज़ में साझा किया।
कार्यक्रम के दौरान किसी बच्चे ने माँ की दुआओं का ज़िक्र किया तो किसी ने उनकी मेहनत और त्याग को याद करते हुए अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। बच्चों की बातों को सुनकर उपस्थित लोगों की आँखें भी नम हो गईं।
छात्र-छात्राओं ने यह संकल्प लिया कि वे अपनी आदतों में सुधार लाएँगे, अपने माता-पिता की हर बात मानेंगे और कभी उनका दिल नहीं दुखाएँगे। पूरे कार्यक्रम का माहौल सम्मान, भावनाओं और माँ की मोहब्बत से सराबोर दिखाई दिया।
सूफ़ी एजाज़ आलम खान क़ादरी ने दिया भावुक संदेश
इस अवसर पर विद्यालय के प्रिंसिपल सूफ़ी एजाज़ आलम खान क़ादरी ने बच्चों, अध्यापकों एवं अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि माँ इंसान की सबसे पहली शिक्षक होती है। इंसान बोलना, चलना, संस्कार और मोहब्बत सबसे पहले अपनी माँ से सीखता है।
उन्होंने कहा कि —
“माँ दुनिया की सबसे पहली शिक्षक होती है। माँ से बड़ा कोई शिक्षक नहीं होता। माँ की इज़्ज़त और उसकी बात मानने में ही असली कामयाबी छिपी है।”
उन्होंने आगे भावुक शब्दों में कहा —
“माँ के पैरों तले जन्नत है और बाप जन्नत का दरवाज़ा। इसलिए किसी भी कीमत पर अपने माँ-बाप का दिल मत दुःखाओ। उनकी दुआएँ इंसान की ज़िंदगी बदल देती हैं, जबकि उनकी नाराज़गी खुशियों को भी छीन सकती है।”
बच्चों ने माँ के सम्मान में की दुआ
कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने अपनी माँ के सम्मान में तालियाँ बजाईं और उनके बेहतर स्वास्थ्य, लंबी उम्र एवं खुशहाल जीवन के लिए दुआ की। इस अवसर पर मौजूद सभी लोगों ने बच्चों की भावनात्मक प्रस्तुतियों की सराहना की।
कार्यक्रम में हाफिज नूर मोहम्मद, कलामुद्दीन, फातमा खातून, आमिना खातून, कु. संजना सहित तमाम छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।