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23 Jul 2026, Thu

Supreme Court on President Governor: बिलों पर फैसला लेने की टाइमलाइन नहीं थोप सकता कोर्ट — बड़ा बयान

Supreme Court on President Governor:

पूरा मामला

सुप्रीमकोर्ट का बड़ा निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए साफ कहा कि न्यायपालिका राष्ट्रपति और राज्यपाल पर बिलों पर कार्रवाई करने के लिए “अनिवार्य समय सीमा” नहीं लगा सकती।यह फैसला उस संदर्भ में आया है जब कई राज्य सरकारों ने शिकायत की थी कि उनके भेजे गए बिलों पर राज्यपाल लंबे समय तक कार्रवाई नहीं करते, जिससे प्रशासनिक काम प्रभावित होता है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि> “संविधान के तहत राष्ट्रपति और राज्यपाल अपनी संवैधानिक भूमिका निभाते हैं। उन पर कोर्ट कोई सख्त टाइमलाइन लागू नहीं कर सकता। हां, यह अपेक्षा जरूर है कि वे समय पर निर्णय लें।”

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है

हाल ही में तमिलनाडु, तेलंगाना, पंजाब, केरल जैसे राज्यों ने आरोप लगाया था कि राज्यपाल जानबूझकर बिलों को पेंडिंग रखकर शासन को बाधित कर रहे हैं।राज्यों का कहना था कि देरी सेकानून लागू होने में देर होती हैनीतिगत फैसले अटक जाते हैंसरकार की कार्यप्रणाली प्रभावित होती हैसुप्रीम कोर्ट के इस बयान से अब यह स्पष्ट हो गया है कि➡️ कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगा, लेकिन राष्ट्रपति/राज्यपाल से “रिज़नेबल टाइम” में निर्णय की अपेक्षा रखी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का तर्कसुप्रीम

कोर्ट ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 200 और 201 राष्ट्रपति/राज्यपाल को यह अधिकार देते हैं किवे बिल को मंज़ूरी देंबिल वापस भेजेंया पुनर्विचार के लिए कहेंलेकिन कोर्ट इन संवैधानिक प्रक्रियाओं पर कोई “कड़े समय नियम” नहीं बना सकता।

राज्यों पर क्या असर पड़ेगा?

✔ अब राज्य सरकारों को अदालत से टाइमलाइन की उम्मीद कम करनी होगी

✔ राज्यपाल और केंद्र के साथ बातचीत व राजनीतिक समाधान को तवज्जो देनी पड़ेगी

✔ संवैधानिक पदाधिकारियों की स्वायत्तता को फिर से रेखांकित किया गया है

राजनीतिक प्रतिक्रिया

कई विपक्षी राज्यों ने फैसले को “निराशाजनक” बताया और कहा कि इससे प्रशासन प्रभावित होता रहेगा।वहीं केंद्र सरकार के समर्थकों ने इसे “संवैधानिक मर्यादाओं को कायम रखने” वाला फैसला बताया।