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4 Jun 2026, Thu

आईजीआरएस फर्जी निस्तारण का आरोप: संस्तुति के बाद पलटी रिपोर्ट, जांच की मांग

By Editor Aijaz Alam Khan

आईजीआरएस फर्जी निस्तारण का आरोप: संस्तुति के बाद पलटी रिपोर्ट, जांच की मांग

बस्ती: जनपद बस्ती में आईजीआरएस फर्जी निस्तारण का मामला अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। आयुष विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों ने प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। मानपुर बाबू निवासी मनोज सिंह ने आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारियों ने पैसे लेकर भ्रामक रिपोर्ट तैयार की और पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया।

पहले दी संस्तुति, फिर बदली रिपोर्ट

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिन अधिकारियों ने खुद मौके का निरीक्षण कर प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन को उपयुक्त बताया था, वही अब अपनी रिपोर्ट से पलट गए हैं। यह यू-टर्न कई गंभीर सवाल खड़े करता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि पहले सब कुछ सही बताया गया और बाद में उसे गलत घोषित कर दिया गया।

आयुष विभाग पर लगे गंभीर आरोप

मनोज सिंह के अनुसार, क्षेत्रीय आयुष अधिकारी डॉ. जगदीश यादव और आईजीआरएस पटल पर तैनात कर्मचारी विकास सिंह ने मिलकर इस पूरे मामले में अनियमितता की। आरोप है कि बिना सही जांच के ही फाइल को निपटा दिया गया और जमीनी सच्चाई को नजरअंदाज किया गया।

इस घटना ने न केवल विभागीय पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

भूमि आवंटन में भी गड़बड़ी के आरोप

भानपुर तहसील के ग्रामसभा लोढ़वा और नथवापुर में भूमि आवंटन और विभागीय मंजूरी के बावजूद, आईजीआरएस पर शिकायत आते ही मामले को बिना स्थलीय निरीक्षण के निपटा दिया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि पूरा मामला केवल कागजों पर ही निपटाया गया और वास्तविक स्थिति की अनदेखी की गई।

पूर्व विधायक ने की जांच की मांग

इस मामले को लेकर रुधौली के पूर्व विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह प्रशासन की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करेगा।

न्यायालय जाने की चेतावनी

मनोज सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी सरकारी योजनाओं को अपनी कमाई का जरिया बना रहे हैं, जिससे सरकार की मंशा और जनता दोनों के साथ अन्याय हो रहा है।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

यह मामला अब प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा बन चुका है। जनता की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

निष्कर्ष

आईजीआरएस फर्जी निस्तारण का यह मामला केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल है। यदि समय रहते इस पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

रिपोर्ट : रिज़वान खान

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